गुरु भक्ति और श्रद्धा से सम्पन्न हुआ श्री महंत रामचरण दास जी महाराज का सत्रहवीं भंडारा

गुरु भक्ति और श्रद्धा से सम्पन्न हुआ श्री महंत रामचरण दास जी महाराज का 17वां पुण्यस्मृति महोत्सव
हरिद्वार के खड़खड़ी स्थित प्रसिद्ध श्री जनार्दन आश्रम में ज्ञान, वैराग्य और भक्ति की सजीव प्रतिमूर्ति पूज्य श्री महंत रामचरण दास जी महाराज की 17वीं पुण्यस्मृति अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और गरिमा के साथ मनाई गई। इस अवसर पर विशाल संत समागम का आयोजन हुआ, जिसमें देशभर से आए संत-महात्माओं एवं श्रद्धालु भक्तों ने गुरु महाराज के श्रीचरणों में पुष्प अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
पूज्य श्री महंत रामचरण दास जी महाराज केवल एक संत ही नहीं, बल्कि ज्ञान, भक्ति और वैराग्य की संजीव मूर्ति थे। उन्होंने अपने संपूर्ण जीवनकाल में धर्म, सत्य और सेवा का संदेश देकर असंख्य जनों के जीवन को आलोकित किया। उनकी वाणी में अमृत, आचरण में तप और हृदय में करुणा का अद्भुत संगम था, जिसने उन्हें संत समाज में एक विशिष्ट स्थान प्रदान किया।
इस अवसर पर श्री महंत विष्णु दास जी महाराज ने अपने श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि सद्गुरु का सान्निध्य मनुष्य जीवन का परम सौभाग्य होता है। गुरु केवल ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि आत्मा को जागृत कर जीवन को सार्थक बनाते हैं। उन्होंने गुरुदेव को ज्ञान रूपी अथाह सागर बताते हुए कहा कि उनका जीवन सदैव प्रेरणा देता रहेगा।
महंत सुतीक्षण मुनि महाराज ने कहा कि गुरुदेव का जीवन सादगी, सेवा और साधना का अनुपम उदाहरण था। महंत नारायण दास पटवारी महाराज ने कहा कि गुरु का स्थान ईश्वर से भी बढ़कर है, क्योंकि गुरु ही जीव को ईश्वर तक पहुँचाने का सेतु बनते हैं। बाबा हठयोगी महाराज ने गुरुदेव को धर्म की ज्योति प्रज्वलित रखने वाला महान संत बताया।
महंत हितेश दास महाराज, महंत सूरज दास महाराज, महंत रितेश दास महाराज एवं महंत रामानुज दास महाराज ने भी गुरुदेव के श्रीचरणों में अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि गुरु की महिमा शब्दों से परे है और उनका आशीर्वाद ही जीवन का सबसे बड़ा धन है।
कार्यक्रम का संचालन महंत रविदेव महाराज ने सुंदर एवं सुव्यवस्थित ढंग से किया। इस अवसर पर गुरुदेव के उत्तराधिकारी महंत हर्ष दास महाराज ने कहा कि गुरु ही मनुष्य को ईश्वर से मिलाते हैं, वही जीवन को सही दिशा और मुक्ति का मार्ग दिखाते हैं। उन्होंने गुरुदेव को ज्ञान रूपी सूर्य बताते हुए कहा कि उनका प्रकाश सदैव संसार को आलोकित करता रहेगा।
श्री धर्म सिंह आनंद ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि गुरु भक्तों के सच्चे पथप्रदर्शक होते हैं और उनके मार्गदर्शन के बिना जीवन की सफलता संभव नहीं है।
पूरे आयोजन के दौरान वातावरण गुरु भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत रहा। श्रद्धालु भक्तों ने अश्रुपूरित नेत्रों से गुरुदेव को नमन करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। पूज्य श्री महंत रामचरण दास जी महाराज की दिव्य स्मृतियाँ सदैव भक्तों के हृदय में जीवित रहेंगी और उनका आदर्श आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा।

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