गुरु पूर्णिमा पर महंत शीतलानंद महाराज ने तीन शिष्यों को बनाया उत्तराधिकारी
हरिद्वार (कनखल)। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर होली चौक मोहल्ला स्थित श्री सुखदेव चरणदासीय धर्मशाला आश्रम में एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक निर्णय लिया गया। आश्रम के प्रातः स्मरणीय गुरु भगवान परम पूज्य श्री महंत शीतलानंद जी महाराज ने गुरु-शिष्य परंपरा का निर्वहन करते हुए अपने तीन सेवाभावी शिष्यों को दीक्षा प्रदान कर उन्हें अपना उत्तराधिकारी घोषित किया।
महंत शीतलानंद महाराज ने स्वामी सुरेंद्रानंद महाराज, स्वामी देवदास जी महाराज एवं स्वामी उमेश्वरानंद जी महाराज को गुरु दीक्षा देते हुए कहा कि वे उनके रहते आश्रम की सेवा-टहल करें तथा भविष्य में आश्रम की व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से संचालित करें। उन्होंने यह निर्णय इस उद्देश्य से लिया कि उनके बाद आश्रम में किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो और तीनों शिष्य मिलकर आश्रम का संरक्षण एवं संचालन कर सकें।
इस अवसर पर परम पूज्य कथा व्यास श्री दिनेशानंद महाराज, जो ट्रस्ट के उपाध्यक्ष भी हैं, ने कहा कि गुरु पूर्णिमा के इस पावन अवसर पर महंत जी ने समय रहते एक अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि किसी भी धर्मस्थल के सुचारू संचालन और गुरु-शिष्य परंपरा के निर्वहन के लिए गुरु को योग्य शिष्यों का चयन करना आवश्यक होता है। इस निर्णय से सभी ट्रस्टी एवं सेवक पूर्णतः सहमत हैं।
महंत शीतलानंद महाराज ने अपने संबोधन में कहा कि गुरु पूर्णिमा श्रद्धा, भक्ति और गुरु-शिष्य के पवित्र संबंध का पर्व है। उन्होंने कहा कि मनुष्य के कल्याण और मुक्ति का मार्ग गुरु के वचनों में निहित होता है। जो व्यक्ति गुरु की शरण में जाता है, उसका यह लोक और परलोक दोनों सुधर जाते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि गुरु ही मनुष्य के जीवन में ज्ञान का संचार करते हैं, जिससे उसके ज्ञान-चक्षु खुलते हैं और वह सत्य तथा उन्नति के मार्ग पर अग्रसर होता है। गुरु की शरण ही भवसागर से पार जाने का एकमात्र मार्ग है।
कार्यक्रम में आश्रम के अनेक श्रद्धालु एवं सेवक उपस्थित रहे और सभी ने इस ऐतिहासिक निर्णय का स्वागत किया।

