शिवालिक नगर में बंदरों का बढ़ता आतंक, घरों से लेकर इंस्टीट्यूट तक पहुंचा खतरा
रसोई और फ्रिज से सामान उठा ले जा रहे बंदर, बच्चों व शिक्षकों पर हमले से बढ़ी चिंता; चुनावी वादों पर उठे सवाल
हरिद्वार। शिवालिक नगर में बंदरों का आतंक दिन-प्रतिदिन गंभीर रूप लेता जा रहा है। बंदरों के झुंड अब घरों में घुसकर रसोई का सामान और खाद्य सामग्री उठाने के साथ ही फ्रिज खोलकर उसमें रखा सामान भी निकाल ले जा रहे हैं। बंदरों की बढ़ती संख्या और उनके आक्रामक व्यवहार से क्षेत्रवासियों में भय और चिंता का माहौल बना हुआ है।
सबसे चिंताजनक मामला उस समय सामने आया, जब बंदरों का एक झुंड एक इंस्टीट्यूट में जा घुसा और वहां मौजूद बच्चों एवं शिक्षक को परेशान करते हुए हमला करने का प्रयास किया। अचानक बंदरों के अंदर घुसने से बच्चों में अफरा-तफरी मच गई। शिक्षक ने किसी तरह बच्चों को सुरक्षित किया। घटना के बाद अभिभावकों की चिंता भी बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि जब बंदर शिक्षण संस्थानों तक पहुंचकर बच्चों को परेशान करने लगे हैं तो उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर कदम उठाना जरूरी है।
घर में घुसकर मचा रहे उत्पात
स्थानीय लोगों के अनुसार बंदर अब इंसानों से बिल्कुल नहीं डरते। वे छतों और बालकनी के रास्ते सीधे घरों के अंदर तक पहुंच जाते हैं। रसोई में रखा सामान उठाकर ले जाना, खाने-पीने की वस्तुओं को बिखेरना और फ्रिज खोलकर खाद्य सामग्री निकाल लेना आम होता जा रहा है।
बंदरों के अचानक घर में घुसने से महिलाएं और बच्चे विशेष रूप से भयभीत हैं। लोगों को लगातार आशंका रहती है कि कहीं बंदरों का झुंड किसी छोटे बच्चे, बुजुर्ग या अन्य व्यक्ति पर हमला न कर दे।
चुनाव के दौरान उठता है बंदरों से निजात का मुद्दा
शिवालिक नगर व्यापार मंडल के अध्यक्ष विभास सिन्हा ने बंदरों की समस्या को लेकर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि नगर पालिका से लेकर विधानसभा चुनाव तक शिवालिक नगर को बंदरों के आतंक से मुक्ति दिलाने का मुद्दा लगभग हर चुनाव में प्रमुखता से उठाया जाता है। चुनाव के दौरान जनता से बंदरों की समस्या का स्थायी समाधान कराने के वादे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव समाप्त होने के बाद यह समस्या फिर पीछे छूट जाती है।
उन्होंने कहा कि वर्षों से बंदरों के आतंक से परेशान क्षेत्रवासियों को अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई की जरूरत है।
“अब वादे नहीं, जमीन पर कार्रवाई चाहिए”
विभास सिन्हा ने कहा कि शिवालिक नगर में बंदरों की समस्या अब सामान्य वन्यजीव समस्या नहीं रह गई है। बंदरों का घरों और शिक्षण संस्थानों तक पहुंचना गंभीर चिंता का विषय है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में किसी बच्चे या बुजुर्ग के गंभीर रूप से घायल होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
उन्होंने प्रशासन से मांग की कि शिवालिक नगर में बंदरों के आतंक का तत्काल संज्ञान लिया जाए और संबंधित विभागों की संयुक्त टीम गठित कर प्रभावी अभियान चलाया जाए। साथ ही ऐसी व्यवस्था की जाए जिससे क्षेत्रवासियों को लंबे समय से चली आ रही इस समस्या से स्थायी राहत मिल सके।
जनता का सवाल—आखिर कब मिलेगी बंदरों से निजात?
क्षेत्रवासियों का कहना है कि प्रत्येक चुनाव में बंदरों से मुक्ति का मुद्दा जोर-शोर से उठाया जाता है, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही समस्या को भुला दिया जाता है। नागरिकों का सवाल है कि आखिर कब तक उन्हें अपने घरों और बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित रहना पड़ेगा?
क्षेत्रवासियों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि बंदरों की समस्या के समाधान के लिए स्थायी, प्रभावी और वैज्ञानिक उपाय किए जाएं। लोगों का स्पष्ट कहना है कि अब चुनावी घोषणाओं और आश्वासनों से काम नहीं चलेगा। बंदरों के आतंक से मुक्ति के लिए अब वादे नहीं, जमीन पर ठोस कार्रवाई चाहिए।






