धुंधकारी प्रसंग से मिला सत्कर्म और प्रभु भक्ति का संदेशश्रीमद् भागवत कथा में ज्ञान, वैराग्य और भक्ति का महत्व बताया।
हरिद्वार। भूपतवाला स्थित श्री वेद निकेतन आश्रम में आयोजित श्रीमद् भागवत ज्ञान महायज्ञ कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर कथा का श्रवण किया और पुण्य लाभ अर्जित किया। कथा व्यास प्रातः स्मरणीय परम पूज्य प्रमोद महाराज जी ने श्रीमद् भागवत के विभिन्न प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को ज्ञान, वैराग्य एवं भक्ति के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।कथा के दौरान महाराज जी ने धुंधकारी प्रसंग का सुंदर एवं भावपूर्ण वर्णन करते हुए कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में सत्कर्म, सदाचार और प्रभु भक्ति को अपनाना चाहिए। सांसारिक मोह-माया में फंसकर किए गए कर्मों का परिणाम व्यक्ति को स्वयं ही भोगना पड़ता है। धुंधकारी की कथा के माध्यम से उन्होंने श्रद्धालुओं को समझाया कि श्रीमद् भागवत का श्रवण मनुष्य के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के साथ-साथ उसे भक्ति और सद्मार्ग की ओर प्रेरित करता है।उन्होंने कहा कि ज्ञान मनुष्य को सत्य का बोध कराता है, जबकि वैराग्य उसे सांसारिक आसक्ति से मुक्त होने की प्रेरणा देता है। भगवान की भक्ति और श्रीमद् भागवत का नियमित श्रवण मनुष्य के अंत:करण को शुद्ध करता है तथा जीवन को सार्थक बनाने का मार्ग प्रशस्त करता है।धुंधकारी प्रसंग का वर्णन सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। कथा स्थल पर पूरे समय भक्तिमय वातावरण बना रहा और श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक कथा का श्रवण करते हुए भगवान श्रीहरि के जयकारे लगाए।कथा के आयोजन में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं का आयोजकों द्वारा स्वागत किया गया। कथा के समापन के पश्चात श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।






