शिव आराधना मनुष्य जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य

श्री शिव महापुराण कथा का भव्य समापन, शिव महिमा के दिव्य प्रसंग सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु

हरिद्वार। तीर्थनगरी हरिद्वार के कड़वा पाटीदार भवन, संगमपुरी, भूपतवाला क्षेत्र में श्री शिव एजुकेशन चैरिटेबल ट्रस्ट के तत्वावधान में महिला मंडल द्वारा आयोजित भव्य श्री शिव महापुराण कथा का श्रद्धा, भक्ति और आस्था के साथ समापन हुआ। कथा के दौरान पूरा वातावरण शिवमय बना रहा। हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयघोष से कथा स्थल गुंजायमान होता रहा और श्रद्धालु भगवान शिव की भक्ति में भावविभोर नजर आए।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। उनके साथ परम पूज्य कामेश्वर पुरी जी महाराज, उम्मेद गिरी गोस्वामी भारत भाई पटेल, राम भाई पटेल, तुलसी भाई, जगदीश भाई सहित अनेक गणमान्य अतिथियों और श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर आयोजन की गरिमा बढ़ाई।

शिव महापुराण के दिव्य प्रसंगों ने मोहा मन

कथा के समापन दिवस पर शिव महापुराण के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। कथा वाचिका परम आदरणीय श्री माधुरी बेन गोस्वामी, वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर, ने अपने श्रीमुख से भगवान शिव की महिमा का सरल, सुंदर और भावपूर्ण वर्णन किया। उनके मुखारविंद से निकले शिव महापुराण के दिव्य प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।

कथा में भगवान शिव के लिंग प्राकट्य, शिवरात्रि महात्म्य, गुरु महिमा, बेलपत्र एवं भस्म की महिमा, कुबेर चरित्र, नारद चरित्र तथा माता सती के प्राकट्य सहित अनेक महत्वपूर्ण प्रसंगों का वर्णन किया गया। कथा के दौरान ऐसा आध्यात्मिक वातावरण बना कि श्रद्धालुओं को कैलाशपति महादेव की कृपा का अनुभव होता रहा।

कथावाचिका ने कहा कि भगवान शिव करुणा, त्याग, तपस्या और कल्याण के प्रतीक हैं। जो मनुष्य सच्ची श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान शिव का स्मरण करता है, उसके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। शिव महापुराण केवल धार्मिक ज्ञान प्रदान करने वाला ग्रंथ नहीं है, बल्कि यह मनुष्य को सत्य, सदाचार, सेवा, संयम और परोपकार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

उन्होंने जन्म, मृत्यु और मृत्यु के बाद ईश्वर की प्राप्ति के आध्यात्मिक रहस्यों पर भी प्रकाश डाला तथा बताया कि मनुष्य जीवन को सार्थक बनाने के लिए ईश्वर की भक्ति, सद्कर्म और सेवा का मार्ग अपनाना आवश्यक है।

30 वर्षों से समाजसेवा में जुटा है ट्रस्ट

कार्यक्रम में बताया गया कि श्री शिव एजुकेशन चैरिटेबल ट्रस्ट के संस्थापक एवं संत गोस्वामी उम्मेद गिरी, द्वारका, गुजरात के मार्गदर्शन में ट्रस्ट पिछले करीब 30 वर्षों से समाजसेवा के क्षेत्र में निस्वार्थ भाव से कार्य कर रहा है।

ट्रस्ट द्वारा समय-समय पर रक्तदान शिविर, मेडिकल कैंप, चिकित्सा शिविर और जरूरतमंदों को निशुल्क दवाइयों का वितरण किया जाता है। इसके अलावा बड़ी संख्या में जरूरतमंद एवं विधवा महिलाओं को तीर्थयात्रा, भोजन तथा रहने-ठहरने की निशुल्क व्यवस्था उपलब्ध कराई जाती है।

ट्रस्ट के माध्यम से अब तक करीब 800 से 900 कन्याओं के विवाह भी संपन्न कराए जा चुके हैं। समाजसेवा के साथ-साथ धार्मिक और आध्यात्मिक आयोजनों के माध्यम से भी लोगों को जोड़ने का कार्य निरंतर किया जा रहा है।

तीर्थस्थलों पर निशुल्क कथा और सेवा

ट्रस्ट द्वारा वर्षभर देश के विभिन्न तीर्थस्थलों पर श्रीमद्भागवत कथा, शिव महापुराण कथा, श्री सत्यनारायण कथा, श्री कृष्ण जन्माष्टमी सहित विभिन्न धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों का आयोजन हर्षोल्लास के साथ किया जाता है।

इन आयोजनों में लगभग 300 से 400 श्रद्धालुओं के लिए कथा श्रवण के साथ भोजन, रहने और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं ट्रस्ट द्वारा निशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं। श्रद्धालुओं से किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाता। ट्रस्ट का उद्देश्य धर्म, सेवा और मानव कल्याण के माध्यम से समाज को जोड़ना है।

ट्रस्ट से जुड़कर समाजसेवा और धर्म से जुड़ने का सौभाग्य

शिव महापुराण कथा के समापन अवसर पर श्रद्धालुओं ने भी अपने अनुभव साझा किए। श्रद्धालुओं ने कहा कि वे ट्रस्ट से जुड़कर स्वयं को सौभाग्यशाली महसूस करते हैं। ट्रस्ट से जुड़ने के बाद उन्हें न केवल समाजसेवा करने का अवसर मिला, बल्कि धर्म और आध्यात्मिकता से जुड़ने का भी सौभाग्य प्राप्त हुआ।

उन्होंने कहा कि ट्रस्ट के माध्यम से विभिन्न तीर्थस्थलों पर पहुंचकर धार्मिक कथाओं का श्रवण करना और साथ ही सेवा कार्यों में सहभागी बनना उनके लिए अत्यंत खुशी और संतोष का विषय है।

कथा के समापन पर श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करने के साथ समाज में सेवा, सद्भाव और धार्मिक चेतना को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयघोष के साथ कथा का समापन हुआ।

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