शिवमहापुराण कथा का दूसरा दिन: शिव तत्व और नाम संकीर्तन की महिमा पर हुआ विस्तृत वर्णन

हरिद्वार भूपतवाला में शिव महापुराण कथा का दूसरा दिन: शिव तत्व और नाम संकीर्तन की महिमा पर हुआ विस्तृत वर्णन

हरिद्वार, भूपतवाला। पंचवटी श्री सीताराम आश्रम, बहराइच के तत्वाधान में आयोजित शिव महापुराण कथा के द्वितीय दिवस पर कथा व्यास प्रातः स्मरणीय परम पूज्य श्री रवि शंकर जी महाराज (गुरु भाई) के श्रीमुख से श्रद्धालुओं को शिव तत्व, सृष्टि की उत्पत्ति और भक्ति के महत्व का गहन ज्ञान प्राप्त हुआ। कथा स्थल पर भक्ति और आस्था का अद्भुत वातावरण देखने को मिला।

मंगलाचरण और शिव नाम संकीर्तन से हुआ शुभारंभ
दूसरे दिन की कथा का प्रारंभ भव्य मंगलाचरण और “नमः शिवाय” के संकीर्तन के साथ हुआ। कथावाचक ने बताया कि कलयुग में शिव नाम का जप ही सबसे सरल और प्रभावशाली साधन है, जो मनुष्य को पापों से मुक्त कर आत्मा को परमात्मा से जोड़ता है।

शिव तत्व और सृष्टि के रहस्य का वर्णन
कथा में बताया गया कि सृष्टि के प्रारंभ में केवल शून्य और अंधकार था, जिसमें केवल सदाशिव (निराकार ब्रह्म) ही विद्यमान थे। उनकी इच्छा से पराशक्ति (माता उमा) का प्राकट्य हुआ, जिसके पश्चात सृष्टि का विस्तार हुआ।
भगवान शिव और शक्ति से भगवान विष्णु का प्राकट्य हुआ, फिर विष्णु जी की नाभि से ब्रह्मा जी उत्पन्न हुए और अंत में संहार के लिए रुद्र का प्राकट्य हुआ। इस प्रकार ब्रह्मा, विष्णु और महेश एक ही परम तत्व के विभिन्न स्वरूप बताए गए।

चंचुला कथा से मिला भक्ति का संदेश
दूसरे दिन चंचुला की कथा का उत्तरार्ध सुनाया गया, जिसमें बताया गया कि शिवपुराण श्रवण से उसे शिवलोक की प्राप्ति हुई। उसने अपने पापी पति बिंदुग के उद्धार के लिए माता पार्वती से प्रार्थना की, जिसके फलस्वरूप भगवान शिव की कृपा से उसका भी कल्याण हुआ। इस प्रसंग ने श्रद्धालुओं में अटूट विश्वास जगाया कि सच्ची भक्ति से हर पापी का उद्धार संभव है।

आध्यात्मिक संदेश: अहंकार त्याग और निष्काम भक्ति का महत्व
कथा के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि ईश्वर की प्राप्ति के लिए अहंकार का त्याग अनिवार्य है। साथ ही, केवल कथा सुनना ही नहीं, बल्कि उसके सिद्धांतों को जीवन में अपनाना भी आवश्यक है।
भगवान शिव की भक्ति में निष्काम भाव का विशेष महत्व बताया गया—वे सरलता से प्रसन्न होते हैं, यदि भक्ति सच्चे मन से की जाए।

भव्य आरती के साथ हुआ समापन
दूसरे दिन की कथा का समापन भव्य आरती और “हर हर महादेव” के जयघोष के साथ हुआ, जिससे पूरा वातावरण शिवमय हो गया। श्रद्धालुओं ने गहरी आस्था और भक्ति के साथ कथा का रसपान किया।


यह आयोजन क्षेत्र में आध्यात्मिक जागरण का महत्वपूर्ण केंद्र बनता जा रहा है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए पहुंच रहे हैं।

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