भक्ति रस में डूबा हरिद्वार: गोवर्धन लीला सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु
हरिद्वार के भीमगोड़ा स्थित श्री कृष्ण परमधाम आश्रम में आयोजित गीता ज्ञान एवं श्रीमद्भागवत कथा अनुष्ठान के पांचवें दिन श्रद्धालु भक्ति एवं अध्यात्म की अविरल धारा में सराबोर हो उठे। कथा व्यास सत्य पंडित राम मुदगल शास्त्री जी (श्रीधाम वृंदावन) ने भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन करते हुए गोवर्धन पूजा एवं इंद्र के अहंकार भंजन का प्रसंग सुनाया।
उन्होंने बताया कि जब ब्रजवासियों ने भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर इंद्र पूजा के स्थान पर गोवर्धन पर्वत की पूजा की, तब देवराज इंद्र अपने अहंकार में क्रोधित हो उठे और ब्रजभूमि पर भीषण वर्षा का प्रकोप बरसाया। उस संकट की घड़ी में भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी कनिष्ठा अंगुली पर गोवर्धन पर्वत धारण कर समस्त ब्रजवासियों एवं गौधन की रक्षा की।
इस लीला के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण ने यह संदेश दिया कि अहंकार का अंत निश्चित है और जो भक्त सच्ची श्रद्धा के साथ प्रभु की शरण में आता है, उसकी रक्षा स्वयं भगवान करते हैं।
कथा के दौरान गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण की महिमा सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। भजनों और संकीर्तन की मधुर ध्वनि से पूरा आश्रम परिसर भक्तिमय हो गया। श्रद्धालु नाचते-झूमते हुए भगवान के जयकारे लगाते रहे और कई भक्तों की आंखें प्रभु प्रेम में अश्रुपूरित हो गईं।
कथा व्यास ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन को धर्म, भक्ति, सदाचार और ईश्वर के प्रति समर्पण का मार्ग दिखाने वाली दिव्य ज्ञानगंगा है। कथा श्रवण से मनुष्य में सकारात्मकता, आत्मविश्वास और प्रभु के प्रति अटूट श्रद्धा का संचार होता है।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और सभी ने कथा अमृत का रसास्वादन कर अपने जीवन को धन्य बनाया। पूरा आश्रम भगवान श्रीकृष्ण के जयघोष से गुंजायमान रहा।

