साक्षात ईश्वर की प्रतिमूर्ति हैं सतगुरु – स्वामी ऋषि रामकृष्ण महाराज
हरिद्वार, 28 जुलाई
निर्धन निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी ऋषि रामकृष्ण महाराज ने गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर कहा कि गुरु परमात्मा का ही दूसरा स्वरूप होते हैं और संसार में गुरु से बढ़कर कुछ भी नहीं है। आश्रम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के समापन अवसर पर संत सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि गुरु ही शिष्य को अज्ञान रूपी अंधकार से निकालकर उसे जीवन रूपी भवसागर से पार लगाते हैं। उन्होंने सभी से अपने गुरुजनों का सदैव आदर और सम्मान करने का आह्वान किया।
महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतनानंद ने अपने संबोधन में कहा कि श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान की अविरल बहने वाली गंगा के समान है। उन्होंने स्वामी ऋषि रामकृष्ण महाराज द्वारा अपने गुरुजनों की स्मृति में कथा आयोजन को अत्यंत सराहनीय बताया और इसे प्रेरणादायक बताया।
महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधानंद गिरी एवं बाबा हठयोगी ने कहा कि स्वामी ऋषि रामकृष्ण महाराज मानव कल्याण और शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर योगदान दे रहे हैं। उनके द्वारा आयोजित यह श्रीमद्भागवत कथा समाज के लिए कल्याणकारी सिद्ध होगी।
इस अवसर पर संत परंपराओं को आगे बढ़ाने में विशेष योगदान के लिए महामंडलेश्वर रामानुज सरस्वती को सम्मानित किया गया। कथा के मुख्य यजमान राजेंद्र बंसल ने सभी संतों का पुष्पमालाओं से स्वागत किया।
कार्यक्रम में स्वामी हरिवल्लभ दास शास्त्री, महंत मोहन सिंह, स्वामी रामानुज सरस्वती, स्वामी अनंतानंद, स्वामी हरिहरानंद, महंत राघवेंद्र दास, स्वामी शिवानंद भारती, महंत सूरज दास, महंत रघुवीर दास, महंत बिहारी शरण, महंत शुभम गिरी सहित अनेक संत-महंत एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।
गुरु पूर्णिमा पर विशेष संदेश:
गुरु वह प्रकाश हैं जो जीवन के अंधकार को दूर करते हैं।
गुरु वह मार्गदर्शक हैं जो सही दिशा दिखाते हैं।
गुरु का आशीर्वाद जीवन को सफल और सार्थक बनाता है।
“गुरु बिना ज्ञान नहीं, और ज्ञान बिना जीवन अधूरा है।”
“गुरु ही वह शक्ति हैं जो साधारण को असाधारण बना देते हैं।”
इस गुरु पूर्णिमा पर अपने गुरुजनों के प्रति श्रद्धा, समर्पण और कृतज्ञता व्यक्त करें।

