हरिद्वार में संत परंपरा के पावन सान्निध्य में भवन का भव्य लोकार्पण समारोह

हरिद्वार में संत परंपरा के पावन सान्निध्य में भवन का भव्य लोकार्पण समारोह

हरिद्वार के वैदिक सनातन धर्म मंदिर में ऋषि मेही परंपरा की पावन प्रेरणा एवं परम पूज्य परमहंस जी महाराज की दिव्य कृपा से हरिपुर गली नंबर 3 स्थित नव-निर्मित भवन का भव्य लोकार्पण समारोह अत्यंत श्रद्धा एवं उत्साह के साथ सम्पन्न हुआ। इस पावन अवसर पर संस्थापक अध्यक्ष परम पूज्य स्वामी व्यासानंद जी महाराज के पावन सान्निध्य में कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

समारोह में देश के विभिन्न क्षेत्रों से पधारे संत-महात्माओं, विद्वानों एवं श्रद्धालु भक्तों ने बढ़-चढ़कर सहभागिता की, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति भाव से ओत-प्रोत हो गया। कार्यक्रम के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार, भजन-कीर्तन एवं सत्संग के माध्यम से भक्तिमय वातावरण निर्मित हुआ।

इस अवसर पर परम पूज्य स्वामी व्यासानंद जी महाराज ने अपने श्रीमुख से अमृतमयी वाणी का रसपान कराते हुए कहा कि सनातन धर्म केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि समस्त मानवता के कल्याण का दिव्य मार्ग है। संत समाज सदैव धर्म, संस्कृति, सेवा और सदाचार की ज्योति प्रज्वलित करता आया है। उन्होंने यह भी कहा कि संतों के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात कर ही मनुष्य सच्चे सुख, शांति और आध्यात्मिक उन्नति को प्राप्त कर सकता है।

स्वामी जी ने उपस्थित श्रद्धालुओं से भारतीय संस्कृति, वैदिक परंपराओं एवं गुरु-भक्ति को अपने जीवन का आधार बनाने का आह्वान किया। समारोह के दौरान संतों का सम्मान भी किया गया, जिससे कार्यक्रम की गरिमा और भी बढ़ गई।

अंत में सभी श्रद्धालुओं ने संतों का आशीर्वाद प्राप्त कर कार्यक्रम की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त की और इस पावन आयोजन को जीवन का अविस्मरणीय क्षण बताया।


गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर श्रद्धा-सुमन

गुरु पूर्णिमा के इस पावन पर्व पर हम अपने पूज्य गुरु महाराज के श्रीचरणों में कोटि-कोटि नमन करते हैं।
गुरु ही वह दिव्य प्रकाश हैं, जो अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

गुरु कृपा के बिना न तो ज्ञान की प्राप्ति संभव है और न ही जीवन का सच्चा उद्देश्य समझ में आता है।
गुरु हमारे जीवन के पथ-प्रदर्शक, मार्गदर्शक और सच्चे हितैषी होते हैं।

कुछ भावपूर्ण पंक्तियाँ—

गुरु हैं जीवन की ज्योति, गुरु हैं सत्य का द्वार,
गुरु कृपा से ही मिलता है, भवसागर से पार।

गुरु बिना ज्ञान अधूरा, गुरु बिना जीवन शून्य,
गुरु चरणों में जो झुके, वही बनता है धन्य।

गुरु ही ब्रह्मा, गुरु ही विष्णु, गुरु ही हैं महेश,
गुरु साक्षात परब्रह्म हैं, उन्हें नमन विशेष।

गुरु पूर्णिमा के इस शुभ अवसर पर हम सभी यह संकल्प लें कि गुरु के बताए मार्ग पर चलकर अपने जीवन को सार्थक एवं सफल बनाएँ।

गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएँ!

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