गंगा दशहरा पर उज्जैन में भव्य शिप्रा पूजन — अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत श्री रवींद्र पुरी जी महाराज का दिव्य संदेश

गंगा दशहरा पर उज्जैन में भव्य शिप्रा पूजन — अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत श्री रवींद्र पुरी जी महाराज का दिव्य संदेश
उज्जैन में गंगा दशहरा के पावन अवसर पर आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। शिप्रा नदी के तट पर श्री निरंजनी अखाड़ा एवं अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत श्री रवींद्र पुरी जी महाराज ने विधि-विधान से पूजन-अर्चन कर सनातन परंपराओं की गरिमा को पुनः प्रतिष्ठित किया।
इसके पश्चात श्री चिंतामन गणेश मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना का सौभाग्य प्राप्त हुआ, जहाँ वातावरण पूर्णतः भक्तिमय और दिव्य अनुभूति से ओतप्रोत रहा।
गंगा दशहरा का आध्यात्मिक महत्व
गंगा दशहरा सनातन धर्म का अत्यंत पवित्र पर्व है। मान्यता है कि इसी दिन मां गंगा पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं, ताकि समस्त जीवों के पापों का हरण कर उन्हें मोक्ष का मार्ग प्रदान कर सकें।
इस दिन स्नान, दान और जप-तप का विशेष महत्व होता है। ऐसा कहा जाता है कि इस पर्व पर श्रद्धा से स्नान करने से मनुष्य के दस प्रकार के पाप नष्ट होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
महंत श्री रवींद्र पुरी जी महाराज — आध्यात्मिक नेतृत्व की प्रेरणादायक छवि
अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत श्री रवींद्र पुरी जी महाराज का व्यक्तित्व सनातन धर्म की जीवंत परंपरा का प्रतीक है। उनका जीवन त्याग, तप और सेवा का अद्भुत संगम है।
उनके नेतृत्व में अखाड़ा परिषद न केवल धार्मिक परंपराओं को संरक्षित कर रही है, बल्कि समाज को आध्यात्मिक दिशा भी प्रदान कर रही है।
उनकी सरलता, विद्वता और धर्म के प्रति अटूट समर्पण उन्हें संत समाज में विशेष स्थान प्रदान करता है। वे सदैव मानवता, सदाचार और धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश देते हैं।
महंत श्री रवींद्र पुरी जी महाराज के प्रेरणादायक वचन
इस पावन अवसर पर महाराज श्री ने अपने उद्बोधन में कहा:
“गंगा दशहरा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि का दिव्य अवसर है।
जैसे मां गंगा अपने स्पर्श से सबको पवित्र करती हैं, वैसे ही हमें अपने विचार, व्यवहार और जीवन को भी निर्मल बनाना चाहिए।
सनातन धर्म हमें केवल पूजा-पाठ ही नहीं, बल्कि सेवा, करुणा और सत्य के मार्ग पर चलना सिखाता है।”
उन्होंने आगे कहा कि आज के समय में धर्म का वास्तविक अर्थ समझना और उसे जीवन में उतारना अत्यंत आवश्यक है।
विशिष्ट संतों एवं श्रद्धालुओं की गरिमामयी उपस्थिति
इस पावन अवसर पर अनेक संत-महात्माओं एवं गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ा दिया।
इनमें प्रमुख रूप से श्रीमहंत आनंदपुरी महाराज, श्रीमहंत रामेश्वरानंद गिरि महाराज, श्रीमहंत आदित्य गिरि महाराज, श्रीमहंत रत्न गिरि महाराज, श्रीमहंत ओम भारती महाराज, श्रीमहंत सहदेवानंद गिरि महाराज, श्रीमहंत आनंदेश्वरानंद गिरि महाराज, महंत गिरिशानंद गिरि महाराज, किन्नर अखाड़ा के महामंडलेश्वर पवित्रानंद गिरि महाराज सहित अनेक संत एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।
आध्यात्मिकता से सराबोर दिव्य वातावरण
पूरे कार्यक्रम के दौरान उज्जैन नगरी भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित रही। शिप्रा तट पर गूंजते मंत्रोच्चार, दीपों की ज्योति और संतों की उपस्थिति ने इस आयोजन को अत्यंत दिव्य और स्मरणीय बना दिया।
यह आयोजन न केवल एक धार्मिक परंपरा का निर्वहन था, बल्कि समाज को आध्यात्मिक जागरूकता और सांस्कृतिक एकता का संदेश देने वाला एक प्रेरणादायक क्षण भी रहा।

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