अखाड़े में ‘नकली देवता’ विवाद पर कार्रवाई की मांग, जांच के बाद होगी सख्त कार्रवाई: रविंद्रपुरी
हरिद्वार, 27 जुलाई।
श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन (पंजाब गुट) के संतों ने अखाड़े के सचिव महंत गणेश दास के नेतृत्व में श्री दक्षिण काली मंदिर में निरंजन पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ. रविंद्रपुरी से मुलाकात कर अपनी समस्याएं रखीं।
संतों ने आरोप लगाया कि अखाड़े के कुछ लोगों ने ‘नकली देवता’ तैयार कर लिए हैं, जबकि असली देवता उनके पास हैं। उन्होंने यह भी बताया कि प्रयागराज कुंभ में इन कथित नकली देवताओं को स्नान भी कराया गया। साथ ही अखाड़े की संपत्ति में अनियमितता और विरोध करने वाले महंतों के निष्कासन का मुद्दा भी उठाया गया।
महंत गणेश दास ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि वे न्याय के लिए अदालत में भी संघर्ष कर रहे हैं और जरूरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अखाड़ा परिषद अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ. रविंद्रपुरी ने कहा कि नकली देवता बनाना सनातन धर्म का अपमान और जालसाजी है। उन्होंने बताया कि जांच के लिए एक कमेटी गठित की गई है, जो 10 से 15 दिनों में अपनी रिपोर्ट देगी। जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और जिनके पास असली देवता होंगे, उन्हें ही मान्यता दी जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब पुलिस और सरकार भी मामले की जांच कर रही है और जल्द ही सच्चाई सामने आएगी। संतों के निष्कासन को गलत बताते हुए उन्होंने पीड़ितों को न्याय दिलाने का भरोसा दिया और उनकी सुरक्षा के लिए पंजाब व उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तथा डीजीपी से मुलाकात करने की बात कही।
वहीं, आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी ने निष्पक्ष और समयबद्ध जांच पर जोर देते हुए कहा कि तथ्यों के आधार पर ही कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
इस दौरान महंत रमन मुनि, महंत दयाल दास, बाबा भरपूर दास, बाबा बेंट दास सहित बड़ी संख्या में संत उपस्थित रहे।
गौरतलब है कि एक दिन पूर्व भी पंजाब से आए संतों ने अखाड़ा परिषद के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर जांच और कार्रवाई की मांग दोहराई थी।

