उमिया धाम, हरिपुर कला में श्रीमद्भागवत कथा का भव्य शुभारंभ
हरिद्वार की विश्व प्रसिद्ध धर्मनगरी में स्थित हरिपुर कला के सुप्रसिद्ध उमिया धाम में श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ हुआ। कथा के प्रथम दिवस पर पूज्य कथा व्यास श्री हितेंद्र भाई मेहता के श्रीमुख से निकली अमृतमयी वाणी ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
कथा पंडाल में भगवान के जयकारों, मधुर भजनों और हरिनाम संकीर्तन से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालु भक्ति में लीन होकर झूमते, नाचते और प्रभु नाम का गुणगान करते नजर आए। प्रथम दिवस की कथा में पूज्य श्री मेहता ने श्रीमद्भागवत महापुराण की महिमा का विस्तार से वर्णन करते हुए बताया कि कलियुग में भगवान की भक्ति, संतों का संग और भागवत श्रवण ही मानव जीवन के कल्याण का सर्वोत्तम मार्ग है।
उन्होंने राजा परीक्षित और श्री शुकदेव जी महाराज के दिव्य संवाद का मार्मिक प्रसंग सुनाते हुए कहा कि मनुष्य जीवन अत्यंत दुर्लभ है, इसलिए इसे प्रभु भक्ति, सेवा और सत्संग में लगाकर ही सार्थक बनाया जा सकता है।
इस अवसर पर यजमान श्रीमती चंद्रिका बेन पटेल एवं श्री हितेश भाई पटेल ने अपने भाव व्यक्त करते हुए कहा कि मां गंगा की पावन गोद में हरिद्वार में कथा आयोजन उनके जीवन का सौभाग्य है। उन्होंने बताया कि इस पवित्र भूमि पर कथा श्रवण से उन्हें अद्भुत आत्मिक शांति और दिव्य आनंद की अनुभूति हो रही है।
श्री गौरांग पटेल, श्री गवराग पटेल और श्री देव पटेल ने भी अपने विचार साझा करते हुए कहा कि संतों के सान्निध्य में हरिद्वार की पावन धरा पर भागवत कथा सुनना जीवन की अमूल्य धरोहर है।
कथा के समापन पर श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से संकीर्तन किया और पूरा परिसर “राधे-राधे”, “जय श्रीकृष्ण” और “हर हर गंगे” के जयघोष से गूंज उठा। सैकड़ों की संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर स्वयं को धन्य और कृतार्थ महसूस किया तथा आगामी दिनों में अधिकाधिक संख्या में कथा सुनने का संकल्प लिया।
आयोजन समिति द्वारा सभी श्रद्धालुओं का स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। विशेष रूप से गुजरात से पधारे भक्तजन भी इस दिव्य कथा का रसपान कर भावविभोर हो
उमिया धाम, हरिपुर कला में श्रीमद्भागवत कथा का भव्य शुभारंभ

