चारधाम यात्रा राष्ट्रीय आस्था का महान अभियान, व्यवस्थाओं को और सुदृढ़ करने की आवश्यकता: महामंडलेश्वर संतोषानंद जी महाराज

चारधाम यात्रा राष्ट्रीय आस्था का महान अभियान, व्यवस्थाओं को और सुदृढ़ करने की आवश्यकता: महामंडलेश्वर संतोषानंद जी महाराज

हरिद्वार (पूजा शर्मा, रिपोर्टर):
शंकर आश्रम स्थित श्री अवधूत मंडल आश्रम में आयोजित एक विशेष संवाद कार्यक्रम में पूज्य महामंडलेश्वर स्वामी संतोषानंद जी महाराज ने अपनी हाल ही में संपन्न हुई बद्रीनाथ एवं चारधाम यात्रा के दिव्य अनुभव श्रद्धालुओं के साथ साझा किए। उन्होंने अपने ओजस्वी एवं प्रेरणादायी वक्तव्य में कहा कि चारधाम यात्रा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, विश्वास और आध्यात्मिक चेतना का विराट संगम है।

महाराज श्री ने कहा कि उत्तराखंड सरकार और प्रशासन द्वारा यात्रा को सुव्यवस्थित बनाने हेतु किए जा रहे प्रयास सराहनीय एवं प्रशंसनीय हैं। किंतु हर वर्ष बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए व्यवस्थाओं को और अधिक आधुनिक, मजबूत एवं सुव्यवस्थित बनाने की आवश्यकता है, ताकि प्रत्येक यात्री को सहज, सुरक्षित और संतोषजनक यात्रा का अनुभव मिल सके।

उन्होंने विशेष रूप से सुझाव दिया कि यात्रा मार्गों के प्रमुख पड़ावों पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, शुद्ध पेयजल, स्वच्छ एवं सुलभ शौचालय, आरामदायक विश्राम स्थल तथा सुचारु यातायात प्रबंधन सुनिश्चित किया जाए। इससे श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा और यात्रा अधिक सुगम बन सकेगी।

महामंडलेश्वर संतोषानंद जी महाराज, जो अपनी सरलता, गहन आध्यात्मिक दृष्टि एवं समाज के प्रति समर्पित भावना के लिए विख्यात हैं, ने कहा कि चारधाम यात्रा भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और आध्यात्मिक गौरव की जीवंत पहचान है। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को उत्कृष्ट सुविधाएं उपलब्ध कराना हम सभी का सामूहिक दायित्व है।

उन्होंने यात्रा के दौरान सेवा में लगे स्वयंसेवकों, प्रशासनिक अधिकारियों एवं स्थानीय निवासियों के समर्पण और सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि इनके अथक प्रयासों से ही यह विशाल यात्रा सफलतापूर्वक संचालित हो पाती है।

महाराज श्री ने श्रद्धालुओं से भी विनम्र अपील की कि वे यात्रा के दौरान अनुशासन बनाए रखें, पर्यावरण संरक्षण का विशेष ध्यान रखें तथा प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। उन्होंने कहा कि स्वच्छता, संयम और श्रद्धा के साथ की गई यात्रा ही वास्तविक रूप से पुण्यदायी और फलदायी होती है।

अंत में उन्होंने भगवान बदरीविशाल एवं चारधाम के समस्त देवस्थलों से देश और विश्व के कल्याण, सुख-समृद्धि एवं मानवता के मंगल की कामना करते हुए सभी श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित, सफल और मंगलमय यात्रा की प्रार्थना की।

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