ध्रुव भक्ति, सतीत्व की महिमा और नृसिंह अवतार के प्रसंगों से गूंजा हरिद्वार का रामेश्वर आश्रम हरिद्वार।हरिद्वार के संन्यास रोड, कनखल स्थित श्री रामेश्वर आश्रम में चल रही पावन श्रीमद्भागवत सप्ताह कथा में आज का दिन भक्ति, भाव और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा। कथा व्यास प्रातः स्मरणीय परम पूज्य सागर भाई भट्ट ने अपनी ओजस्वी एवं भावपूर्ण वाणी से भक्त ध्रुव, माता सती (पार्वती) की महिमा और भगवान नृसिंह अवतार के दिव्य प्रसंगों का मनमोहक वर्णन किया, जिससे श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।कथा के दौरान पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु “हरि नाम” के संकीर्तन में लीन होकर झूमते नजर आए और पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। कथाव्यास ने बालक ध्रुव की अटूट भक्ति, कठोर तपस्या और प्रभु के प्रति अडिग विश्वास का उल्लेख करते हुए बताया कि अपमान और कठिन परिस्थितियों को भी जिसने ईश्वर प्राप्ति का साधन बना लिया, उसे स्वयं भगवान ने दर्शन देकर अपने स्नेह का पात्र बनाया।उन्होंने कहा, “जिस हृदय में अटल भक्ति का दीप प्रज्वलित होता है, वहाँ स्वयं भगवान का वास होता है।”इसी क्रम में उन्होंने प्रसिद्ध श्लोक—“नाहं वसामि वैकुण्ठे योगिनां हृदये न च।मद्भक्ता यत्र गायन्ति तत्र तिष्ठामि नारद॥”का अर्थ समझाते हुए बताया कि भगवान का वास्तविक निवास भक्तों के प्रेमपूर्ण हृदय में होता है।इसके उपरांत माता सती के तप, त्याग और अटूट पतिव्रत धर्म का मार्मिक वर्णन करते हुए उन्होंने नारी शक्ति की महानता को रेखांकित किया। इस प्रसंग को सुनकर अनेक श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं।कथा में भगवान नृसिंह अवतार का रोमांचकारी वर्णन करते हुए कथाव्यास ने भक्त प्रह्लाद की रक्षा और हिरण्यकश्यप के अंत का संदेश देते हुए कहा कि जब-जब भक्त संकट में होता है, भगवान स्वयं उसकी रक्षा के लिए अवतरित होते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अहंकार का अंत निश्चित है, जबकि भक्ति सदा अमर रहती है।कथा के समापन पर श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन और जयकारों के साथ वातावरण को और अधिक भक्तिमय बना दिया। आश्रम परिसर भक्ति रस से सराबोर दिखाई दिया।इस अवसर पर श्री वैभव भाई, चिंतन भाई, दीपक भाई ठाकर, किरण पाठक, श्रीमती भावना पाठक, अनु बेन, भानु बेन, लीला बेन, अंशु बेन, आशा बेन हीडोचा, देविका मकवाना, धर्मेश भाई पटेल, शैलेश भाई पाठक, अशोक भाई ठाकर सहित गुजरात एवं मुंबई से बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण हेतु उपस्थित रहे।
श्री मद् भागवत कथा का यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक जागरण का केंद्र बना हुआ है, जहां प्रतिदिन भक्ति, ज्ञान और संस्कारों की अमृत वर्षा हो रही है।

