हरिद्वार। सिरसा से पधारे समस्त तायल परिवार द्वारा हरिद्वार के भूपतवाला स्थित अग्रवाल भवन भूपतवाला में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का आज हवन, विशाल भंडारे और ब्राह्मण भोज के साथ भव्य समापन हुआ। समापन अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति रही और पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
कथा व्यास महावीर शास्त्री जी (संघरिया वाले) ने कथा के अंतिम दिवस भगवान कृष्ण की महिमा का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि “भगवान श्रीकृष्ण केवल एक अवतार नहीं, बल्कि स्वयं पूर्ण पुरुषोत्तम परमात्मा हैं। उनकी लीला अपरंपार है, उनका नाम ही जीवन के अंधकार को दूर करने वाला प्रकाश है। जो श्रद्धा और विश्वास से श्रीकृष्ण का स्मरण करता है, उसके जीवन के सभी कष्ट स्वतः दूर हो जाते हैं।”
कथा व्यास जी ने आगे कहा कि “श्रीकृष्ण की वंशी की मधुर ध्वनि केवल गोपियों को ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण सृष्टि को मोहित कर लेती है। उनकी बाल लीलाएं हमें निष्कपट प्रेम और आनंद का संदेश देती हैं, तो कुरुक्षेत्र में दिया गया उपदेश धर्म, कर्म और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।”
उन्होंने श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, माखन चोरी, कालिय नाग दमन और गोवर्धन धारण की कथा का सुंदर वर्णन करते हुए बताया कि भगवान हर युग में अपने भक्तों की रक्षा के लिए अवतरित होते हैं। श्रीकृष्ण की लीलाएं यह सिखाती हैं कि जीवन में चाहे कितनी भी कठिनाइयां क्यों न आएं, यदि श्रद्धा अटल हो तो ईश्वर स्वयं मार्ग प्रशस्त करते हैं।
सात दिनों तक चले इस आध्यात्मिक आयोजन में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित किया। समापन दिवस पर विधि-विधान से हवन संपन्न हुआ, तत्पश्चात विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। ब्राह्मण भोज के साथ कार्यक्रम का विधिवत समापन हुआ।
समस्त तायल परिवार ने आए हुए सभी श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह आयोजन समाज में धर्म, संस्कार और भक्ति भाव को प्रबल करने का एक छोटा सा प्रयास है। पूरे आयोजन के दौरान भक्ति, श्रद्धा और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला।
श्रीमद् भागवतकथा का भव्य समापन: हवन, भंडारे और ब्राह्मण भोज के साथ गूंजा हरि-नाम

