श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर में दिव्य संत समागम एवं भव्य भंडारा संपन्न
गुरु भगवान महामंडलेश्वर 1008 श्री जानकी दास जी महाराज की द्वितीय पुण्यतिथि पर श्रद्धा का सागर उमड़ा
हरिद्वार, भूपतवाला। धर्मनगरी हरिद्वार के भूपतवाला स्थित प्रसिद्ध श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर परिसर में प्रातः स्मरणीय गुरु भगवान महामंडलेश्वर 1008 श्री जानकी दास जी महाराज की द्वितीय पुण्यतिथि के पावन अवसर पर दिव्य संत समागम एवं विशाल संत भंडारे का भव्य आयोजन किया गया। संपूर्ण वातावरण गुरु महिमा, भक्ति और श्रद्धा से गुंजायमान हो उठा।
कार्यक्रम आश्रम के महंत श्री गणेश दास जी महाराज के पावन सानिध्य में संपन्न हुआ। देश के विभिन्न राज्यों से पधारे संत-महात्माओं, श्रद्धालुओं और भक्तजनों की उपस्थिति ने इस आयोजन को आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण कर दिया। मंदिर प्रांगण में वेद मंत्रों, भजन-कीर्तन और गुरु वंदना की मधुर ध्वनियों ने सभी के हृदय को भावविभोर कर दिया।
गुरु महिमा का भावपूर्ण स्मरण
संतों ने अपने उद्बोधन में पूज्य गुरुदेव के दिव्य व्यक्तित्व और कृतित्व का स्मरण करते हुए कहा कि वे केवल एक संत नहीं, बल्कि युगदृष्टा थे, जिन्होंने समाज को सेवा, साधना और संस्कारों का अमूल्य संदेश दिया।
गुरुदेव कहा करते थे—
“गुरु वह दीप है जो अज्ञान के अंधकार को चीरकर आत्मा को परमात्मा से जोड़ देता है।”
“सेवा ही सच्ची साधना है और मानवता ही सबसे बड़ा धर्म।”
उनके द्वारा दिया गया मार्गदर्शन आज भी असंख्य श्रद्धालुओं के जीवन का आधार है। उन्होंने सदैव प्रेम, त्याग, संयम और राष्ट्रसेवा की भावना को जीवन में उतारने की प्रेरणा दी। गुरुदेव का संदेश था कि मनुष्य को अपने जीवन को ईश्वर भक्ति और समाज सेवा के लिए समर्पित करना चाहिए।
संत समागम और भंडारे का आयोजन
पुण्यतिथि के अवसर पर विशाल संत भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। संतों ने गुरुजी की शिक्षाओं को आगे बढ़ाने और आश्रम की सेवा गतिविधियों को निरंतर जारी रखने का संकल्प लिया।
महंत श्री गणेश दास जी महाराज ने अपने संबोधन में कहा कि गुरुदेव का आशीर्वाद सदैव भक्तों पर बना रहेगा और उनका दिखाया मार्ग ही आश्रम की दिशा और दशा तय करेगा। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि गुरुजी के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाकर ही सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित की जा सकती है।
श्रद्धा और आध्यात्म का अनुपम संगम
पूरे आयोजन के दौरान भक्तों की आंखें नम रहीं और हृदय गुरु स्मृति में भाव-विह्वल दिखाई दिए। भक्ति, समर्पण और एकता का यह दृश्य धर्मनगरी हरिद्वार की आध्यात्मिक परंपरा को पुनः सजीव करता नजर आया।
इस प्रकार श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर में आयोजित यह दिव्य संत समागम श्रद्धा, भक्ति और गुरु-भक्ति का अनुपम उदाहरण बन गया, जिसने सभी श्रद्धालुओं के हृदय में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार किया।
श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर में दिव्य संत समागम एवं भव्य भंडारा संपन्न

