हरिद्वार में “अखिल भारतीय संत आश्रम परिषद” का गठन, संतों की एकता और अधिकारों की रक्षा का लिया संकल्प

हरिद्वार में “अखिल भारतीय संत आश्रम परिषद” का गठन, संतों की एकता और अधिकारों की रक्षा का लिया संकल्प
हरिद्वार। भूपतवाला स्थित ओम मुरारी आश्रम, रानी गली में आज आश्रमधारी संतों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में संत समाज की एकता, संरक्षण एवं अधिकारों की सशक्त आवाज़ को संगठित करने के उद्देश्य से सर्वसम्मति से “अखिल भारतीय संत आश्रम परिषद” के गठन की घोषणा की गई।
बैठक में परिषद के पदाधिकारियों का सर्वसम्मति से मनोनयन किया गया, जिनमें—
महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधानन्द गिरी जी महाराज को राष्ट्रीय अध्यक्ष
संत राम विशाल दास जी महाराज को राष्ट्रीय महामंत्री
विनोद महाराज को उपाध्यक्ष
स्वामी स्वयमानन्द जी महाराज को राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष
महंत ओमानंद जी को मंत्री
स्वामी सत्व्रतानन्द जी महाराज को प्रदेश अध्यक्ष
श्रीमहंत गोपाल गिरि जी को राष्ट्रीय सदस्य
तथा श्रीमहंत बाबा हठयोगी जी महाराज को आजीवन संरक्षक नियुक्त किया गया।
बैठक के दौरान संत समाज के प्रति हाल ही में की गई अमर्यादित टिप्पणियों, विशेष रूप से संतों को “कालनेमि” कहे जाने जैसे आपत्तिजनक शब्दों के प्रयोग की परिषद द्वारा कड़े शब्दों में निंदा की गई। इस संबंध में सर्वसम्मति से निंदा प्रस्ताव पारित करते हुए स्पष्ट किया गया कि संत समाज के सम्मान के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं होगा।
परिषद ने यह भी संकल्प लिया कि वह आश्रमधारी संत-महंतों के अधिकारों की रक्षा हेतु हर स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाएगी तथा किसी भी प्रकार के शोषण, अन्याय एवं दुर्व्यवहार के विरुद्ध संगठित और सशक्त आवाज़ उठाएगी।
आगामी अर्धकुंभ को ध्यान में रखते हुए परिषद ने निर्णय लिया कि संतों एवं आश्रमों के लिए आवश्यक सुविधाओं, व्यवस्थाओं और समुचित समन्वय सुनिश्चित कराने हेतु प्रशासन एवं सरकार के समक्ष प्रभावी पहल की जाएगी।
बैठक में यह भी तय किया गया कि शीघ्र ही नवनियुक्त कार्यकारिणी की अगली बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें संगठन के विस्तार, सदस्यता अभियान तथा संतों और आश्रमों की समस्याओं के समाधान के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
परिषद का मुख्य उद्देश्य देशभर के संतों, मठों, मंदिरों एवं आश्रमों को एक सशक्त राष्ट्रीय मंच प्रदान करना है, जिससे उनकी गरिमा, सुरक्षा एवं अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।
बैठक के अंत में उपस्थित सभी संतों ने परिषद की सफलता एवं संत समाज की एकता के लिए सामूहिक संकल्प लिया।
इस अवसर पर प्रमुख रूप से स्वामी प्रद्युम्न दास, स्वामी भैरवानंद गिरी, साध्वी तृप्ता सरस्वती, साध्वी अमिता भारती, स्वामी प्रद्युम्न ब्रह्मचारी, स्वामी शिवानंद, कैलाशनंद, स्वामी बलराम मुनि, स्वामी राघवानंद, स्वामी प्रहलाद दास, स्वामी श्यामानंद, स्वामी चंद्रभूषणानंद सरस्वती, स्वामी प्रज्ञानंद गिरी, स्वामी रामसेवक दास, महंत बलराम मुनि, महंत ओमदास सहित सैकड़ों संत उपस्थित रहे।

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