श्रीमद्भागवत कथा श्रवण से भक्त हुए भावविभोर, हरिद्वार में गूंजा श्रीराम-श्रीकृष्ण भक्ति का रस
हरिद्वार। विश्व प्रसिद्ध धर्मनगरी हरिद्वार के भूपतवाला स्थित श्री चेतन ज्योति आश्रम में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पावन श्रवण से श्रद्धालु भक्तजन भावविभोर हो उठे। कथा व्यास पूज्य रामेश्वर बापू हरियाणी जी के श्रीमुख से प्रवाहित हो रही इस कथा में भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं एवं भक्ति की महिमा का अत्यंत रसपूर्ण वर्णन किया जा रहा है।
कथा के दौरान भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन, मर्यादा, सत्य, धर्म, सेवा एवं त्याग के संदेश को अत्यंत मार्मिक रूप में प्रस्तुत किया गया। वहीं भगवान श्रीकृष्ण की मधुर भक्ति, प्रेम, करुणा और भक्तवत्सल स्वरूप का वर्णन सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए।
कथा व्यास ने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन मानव को आदर्श जीवन जीने की प्रेरणा देता है, जबकि श्रीकृष्ण की भक्ति मनुष्य को सांसारिक बंधनों से मुक्त कर परम आनंद की अनुभूति कराती है। उन्होंने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का दिव्य माध्यम है। कथा श्रवण से मन की चंचलता शांत होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा एवं आध्यात्मिक चेतना का संचार होता है।
इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने अपने भाव व्यक्त करते हुए कहा कि हरिद्वार जैसी पवित्र तपोभूमि में श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करना अनेक जन्मों के पुण्यों का फल है।
श्रद्धालुओं की प्रतिक्रियाएं:
श्री प्रवीण भाई ने कहा, “श्रीमद्भागवत कथा का प्रत्येक प्रसंग जीवन को नई दिशा देता है। यहां कथा श्रवण कर मन को अद्भुत शांति और आनंद प्राप्त हो रहा है।”
श्री लक्ष्मण भाई चावड़ा ने कहा, “भगवान श्रीराम की मर्यादा और श्रीकृष्ण की भक्ति का दिव्य संदेश हर व्यक्ति के जीवन के लिए प्रेरणास्रोत है।”
श्रीमती जय बेन ने कहा, “हरिद्वार में कथा श्रवण करना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। इससे श्रद्धा और विश्वास और अधिक दृढ़ हुआ है।”
श्री प्रवीण भाई चावड़ा ने कहा, “कथा सुनकर ऐसा अनुभव होता है मानो स्वयं भगवान की कृपा बरस रही हो।”
श्रीमती सोनम किशन राज पोपट ने कहा, “श्रीकृष्ण की लीलाओं का श्रवण कर मन अत्यंत प्रसन्न और भावविभोर हो गया है।”
श्री किशन राज पोपट ने कहा, “संत-महात्माओं के सान्निध्य में कथा श्रवण करना जीवन की अमूल्य निधि है। प्रभु भक्ति ही मानव जीवन का वास्तविक आधार है।”
कथा के समापन पर श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से भगवान श्रीहरि के जयघोष लगाए और सभी के कल्याण की प्रार्थना की। पूरा आश्रम क्षेत्र श्रीराम और श्रीकृष्ण के जयकारों से गूंज उठा तथा वातावरण भक्तिमय हो गया।

