भक्ति ही जीवन का सच्चा आलोक: हरिद्वार में श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ

भक्ति ही जीवन का सच्चा आलोक: हरिद्वार में श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ
हरिद्वार। भूपतवाला स्थित वेद निकेतन आश्रम के पावन कथा स्थल में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के प्रथम दिवस पर श्रद्धालुओं को भक्ति, श्रद्धा और भगवान के प्रति समर्पण का दिव्य संदेश प्राप्त हुआ। कथा व्यास हरदेव भाई जोशी ने अपने श्रीमुख से भक्तों को भक्ति मार्ग का महत्व समझाते हुए जीवन को आध्यात्मिक प्रकाश से आलोकित करने का संदेश दिया।
कथा के दौरान उन्होंने एक प्रेरणादायक दृष्टांत सुनाया। उन्होंने बताया कि एक निर्धन वृद्धा प्रतिदिन मंदिर में केवल एक पुष्प अर्पित करती थी। उसके पास न धन था, न वैभव, किंतु उसके हृदय में अटूट श्रद्धा और निष्कपट प्रेम था। एक दिन नगर के धनी लोगों ने भगवान को बहुमूल्य भेंटें अर्पित कीं, फिर भी भगवान की कृपा उस वृद्धा पर बरसी, जिसने सच्चे मन से एक पुष्प अर्पित किया था। इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने बताया कि भगवान को बाहरी आडंबर नहीं, बल्कि शुद्ध भाव और सच्ची भक्ति प्रिय होती है।
कथा व्यास ने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन को धर्म, ज्ञान और भक्ति के प्रकाश से आलोकित करने वाला दिव्य मार्ग है। उन्होंने कहा कि जब मनुष्य अपने जीवन में भगवान के नाम का स्मरण और सत्संग को स्थान देता है, तब उसके भीतर के विकार स्वतः समाप्त होने लगते हैं।
उन्होंने श्रद्धालुओं से सेवा, सत्संग और सदाचार को अपनाने का आह्वान करते हुए मानव जीवन को सफल बनाने का संदेश दिया।
कथा के प्रथम दिवस पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और भक्ति रस में सराबोर हो गए। संपूर्ण वातावरण भगवान के जयकारों और भजनों से गूंज उठा। उपस्थित भक्तों ने कथा के दिव्य संदेशों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लिया।
इस पावन आयोजन का आयोजन गुजरात से पधारे साठिया परिवार द्वारा किया गया, जिसमें श्री प्रवीण भाई साठिया, पाल जी भाई, मटका भाई, भोला भाई साठिया, प्रतीक भाई साठिया, दीप भाई साठिया एवं श्री राम माली सहित साठिया परिवार के सदस्य शामिल रहे। इस अवसर पर भव्य कलश यात्रा एवं पोथी यात्रा भी निकाली गई, जिसने वातावरण को और अधिक भक्तिमय बना दिया। :::

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