हरिद्वार। संत सम्मेलन में संस्कृति व संस्कारों पर जोर, युवाओं को गीता अध्ययन और आयुर्वेद अपनाने की दी सलाह
स्थानीय विश्वविद्यालय में आयोजित संत सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे संतों ने बच्चों और युवाओं को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ संस्कारवान बनने का आह्वान किया। सम्मेलन में संतों ने भारतीय संस्कृति, परंपराओं और नैतिक मूल्यों के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
महामंडलेश्वर अनंतानंद महाराज ने अपने संबोधन में कहा कि आज की युवा पीढ़ी अपनी संस्कृति और संस्कारों से दूर होती जा रही है। उन्होंने बताया कि जिन बच्चों को माता-पिता का आशीर्वाद नहीं मिलता, वे जीवन में सफलता प्राप्त नहीं कर सकते। उन्होंने सनातन परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि सुबह उठकर माता-पिता को प्रणाम करना चाहिए, जिससे दीर्घायु, सफलता और रोगों से मुक्ति मिलती है। साथ ही उन्होंने पश्चिमी संस्कृति से दूर रहकर आयुर्वेद अपनाने की सलाह दी।
प्रयागराज से आए महामंडलेश्वर डॉ. रमनपुरी ने कहा कि आज के युवा सोशल मीडिया में अधिक समय व्यतीत कर रहे हैं, जबकि उन्हें गीता और वेद जैसे ग्रंथों का अध्ययन करना चाहिए। महंत सरिता गिरी ने शिक्षा को सनातन धर्म का पहला पाठ बताते हुए सरकार से मांग की कि स्कूलों और कॉलेजों में सनातन पद्धति को बढ़ावा दिया जाए।
मध्य प्रदेश से पहुंचे महामंडलेश्वर वैराग्यानंद महाराज ने कहा कि केवल सोशल मीडिया की रील देखने से नहीं, बल्कि गीता पढ़ने से ज्ञान प्राप्त होता है। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के जीवन दर्शन का उल्लेख करते हुए युवाओं को प्रेरित किया।
महामंडलेश्वर आदि योगी महाराज ने भगवान शिव के त्रिशूल की वैज्ञानिक व्याख्या प्रस्तुत करते हुए सनातन धर्म के वैज्ञानिक पहलुओं पर प्रकाश डाला। वहीं राष्ट्रीय संत दर्शन भारती जी ने युवाओं से नशाखोरी से दूर रहने और देश की संस्कृति व विरासत की रक्षा करने का आह्वान किया।
चेतना ज्योति आश्रम से आए शुभम महंत ने विद्यार्थियों को सनातन संस्कृति अपनाकर जीवन मूल्यों को समझने की आवश्यकता बताई। सम्मेलन में साध्वी निहारिका, रामानंद सरस्वती, मोहनानंद गिरी, हरिचेतना नंद सहित कई संतों ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम के अंत में विश्वविद्यालय के चेयरमैन जेसी जैन और वाइस चेयरमैन श्रेयांश जैन ने सभी संतों का स्वागत और आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
संत सम्मेलन में संस्कृति व संस्कारों पर जोर, युवाओं को गीता अध्ययन और आयुर्वेद अपनाने की दी सलाह

