प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 वर्षों का कार्यकाल: आत्मनिर्भर भारत और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का स्वर्णिम युग — स्वामी अवधेशानन्द गिरि

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 वर्षों का कार्यकाल: आत्मनिर्भर भारत और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का स्वर्णिम युग — स्वामी अवधेशानन्द गिरि

हरिद्वार, 10 जून 2026।
भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रसेवा, सुशासन और लोककल्याण को समर्पित 12 वर्षों की ऐतिहासिक यात्रा पूर्ण होने के अवसर पर एक विशेष संदेश जारी किया गया। इस अवसर पर भारत की आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक अस्मिता और राष्ट्रीय पुनर्जागरण को रेखांकित करते हुए जूनापीठाधीश्वर आचार्यमहामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानन्द गिरि ने इसे “आत्मनिर्भरता, आत्मगौरव और सनातन सांस्कृतिक चेतना के पुनर्जागरण का स्वर्णिम अध्याय” बताया।

स्वामी अवधेशानन्द गिरि ने कहा कि भारत केवल एक राष्ट्र नहीं, बल्कि एक जीवंत सभ्यता और सनातन सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक है, जहाँ शासन का उद्देश्य केवल सत्ता नहीं बल्कि लोकमंगल और राष्ट्रसेवा होता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को इसी परंपरा का आधुनिक स्वरूप बताते हुए कहा कि उनके व्यक्तित्व में शील, संकल्प, सेवा और समर्पण का अद्वितीय समन्वय दिखाई देता है।

उन्होंने भारतीय परंपरा में “राजर्षि” नेतृत्व की अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में शासन प्रशासन से आगे बढ़कर राष्ट्र निर्माण का व्यापक अभियान बन गया है। उनके नेतृत्व में भारत ने सांस्कृतिक अस्मिता को नए आत्मविश्वास के साथ विश्व मंच पर स्थापित किया है।

पिछले 12 वर्षों में सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं—जैसे प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत, उज्ज्वला योजना, जल जीवन मिशन और जनधन योजना—ने करोड़ों लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाया है। वहीं, आधुनिक रेलवे, वंदे भारत ट्रेन, नए हवाई अड्डे, एक्सप्रेसवे और डिजिटल अवसंरचना के विकास ने देश को नई गति दी है।

राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में भी भारत ने मजबूती दिखाई है और “आत्मनिर्भर भारत” का संकल्प राष्ट्रीय आत्मविश्वास का प्रतीक बनकर उभरा है। सांस्कृतिक दृष्टि से अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण, काशी विश्वनाथ धाम, महाकाल लोक और केदारनाथ धाम का पुनरोद्धार ऐतिहासिक उपलब्धियाँ मानी गई हैं।

स्वामी जी ने कहा कि वैश्विक स्तर पर भी भारत की प्रतिष्ठा में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर स्थापित करने में भारत ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के कार्यनिष्ठ, अनुशासित और कर्मयोगी व्यक्तित्व को प्रेरणादायी बताते हुए कहा कि जब नेतृत्व का लक्ष्य राष्ट्रहित हो, तो परिवर्तन केवल नीतियों में नहीं बल्कि राष्ट्रीय सोच में भी दिखाई देता है।

अपने संदेश के अंत में स्वामी अवधेशानन्द गिरि ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर हार्दिक बधाई देते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और निरंतर राष्ट्रसेवा की कामना की।

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