हरिद्वार के निम्बार्क धाम में पटोत्सव महोत्सव धूमधाम से संपन्न, संत वचनों से गूंजा आश्रम परिसर

हरिद्वार के निम्बार्क धाम में पटोत्सव महोत्सव धूमधाम से संपन्न, संत वचनों से गूंजा आश्रम परिसर
हरिद्वार। रानी गली स्थित निम्बार्क धाम में पटोत्सव कार्यक्रम महंत स्वामी मुरारी शरण जी महाराज के पावन सानिध्य एवं परम पूज्य स्वामी युगल शरण जी महाराज की अनंत कृपा से अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। गंगा दशहरा के पावन अवसर पर आयोजित इस महोत्सव ने पूरे आश्रम परिसर को भक्ति रस में सराबोर कर दिया।
कार्यक्रम के दौरान भजन-कीर्तन, सत्संग एवं संतों के दिव्य आशीर्वचनों से वातावरण पूर्णतः भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में उपस्थित होकर संत महापुरुषों के दर्शन और सत्संग का लाभ प्राप्त किया।
अपने श्रीमुख से अमृतमयी वाणी प्रदान करते हुए महंत स्वामी मुरारी शरण जी महाराज ने कहा कि मनुष्य जीवन अत्यंत दुर्लभ और सौभाग्य से प्राप्त होता है। इसका वास्तविक उद्देश्य भगवान की भक्ति, गुरु सेवा और आत्मिक उन्नति है। उन्होंने बताया कि जिस हृदय में प्रभु नाम का वास हो जाता है, वहां से दुख, भय और अज्ञान स्वतः दूर हो जाते हैं। गुरु कृपा के बिना न तो सच्चा ज्ञान प्राप्त होता है और न ही आत्मिक शांति मिलती है।
उन्होंने आगे कहा कि आज का मनुष्य सांसारिक मोह-माया में फंसकर अपने मूल धर्म और संस्कारों से दूर होता जा रहा है, जबकि संतों का सत्संग और प्रभु भक्ति ही जीवन को सही दिशा प्रदान करते हैं। जो व्यक्ति सच्चे मन से भगवान का स्मरण करता है और गुरु के बताए मार्ग पर चलता है, उसका जीवन सुख, शांति और आनंद से परिपूर्ण हो जाता है।
इस पावन अवसर पर महंत दुर्गादास महाराज, स्वामी कृष्ण देव महाराज, महंत प्रह्लाद दास महाराज, महंत बिहारी शरण महाराज तथा कोतवाल धर्मदास जी महाराज सहित अनेक संत महापुरुषों की गरिमामयी उपस्थिति रही। साथ ही, गुजरात से पधारे मुख्य यजमान रमेश भाई ओझा ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि संत महापुरुषों के दर्शन किसी महान तीर्थ से कम नहीं होते—जो फल तीर्थ दर्शन से प्राप्त होता है, वही संतों के सानिध्य से सहज ही मिल जाता है।
कार्यक्रम के समापन पर विशाल भंडारे एवं प्रसाद वितरण का आयोजन किया गया, जिसमें सभी श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर स्वयं को धन्य महसूस किया। मां गंगा की पावन धरा हरिद्वार में आयोजित यह पटोत्सव न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि समाज में आध्यात्मिक चेतना और सद्भाव का संदेश भी प्रसारित कर गया।
गुरुजी महाराज के लिए श्रद्धापूर्ण शब्द
परम पूज्य गुरुदेव,
आपका सानिध्य हमारे जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य है। आपकी अमृतमयी वाणी, करुणा और कृपा से ही हमारा जीवन सही दिशा प्राप्त करता है। आप ही हमारे लिए ज्ञान के दीपक, भक्ति के मार्गदर्शक और आत्मिक शांति के आधार हैं।
आपके चरणों में समर्पण ही हमारा धर्म है, आपकी सेवा ही हमारी साधना और आपके आशीर्वाद से ही हमारा जीवन सफल है। गुरुदेव, आपकी कृपा सदा हम सभी पर बनी रहे—इसी प्रार्थना के साथ कोटि-कोटि नमन। 🙏

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