भव्य संत समागम में गूंजा राम नाम: गुरु महिमा, भक्ति और गंगा की पावनता का दिव्य संदेश
हरिद्वार।हरिपुर कला स्थित ए एन डी पब्लिक स्कूल परिसर में आयोजित दिव्य एवं भव्य श्री सीताराम महायज्ञ सत्र की पूर्णाहुति के पावन अवसर पर आज एक विराट संत समागम का आयोजन किया गया। यह आध्यात्मिक कार्यक्रम प्रातः स्मरणीय गुरु भगवान श्री रामानंदाचार्य श्री अयोध्या दास जी महाराज के दिव्य सानिध्य में संपन्न हुआ, जिसमें देशभर से पधारे संत-महात्माओं ने अपने अमृतमय वचनों से श्रद्धालुओं को भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का संदेश दिया।समारोह का वातावरण श्रीराम नाम, गुरु वंदना और गंगा मैया के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। सभा को संबोधित करते हुए नरसिंह धाम के महंत श्री राजेंद्र दास जी महाराज ने कहा कि गुरु जीवन की वह दिव्य शक्ति हैं, जो अज्ञान के अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं। उन्होंने गुरु को आत्मा और परमात्मा के बीच सेतु बताते हुए कहा कि गुरु के बिना जीवन अधूरा है।श्री रामानंदाचार्य श्री अयोध्या दास जी महाराज ने भगवान श्रीराम की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि राम केवल त्रेता युग के नायक नहीं, बल्कि संपूर्ण सृष्टि के आदर्श हैं। उन्होंने राम नाम को कलियुग में मुक्ति का सरलतम साधन बताया।साध्वी वैष्णवी जी महाराज ने गुरु कृपा को भक्ति मार्ग का आधार बताते हुए कहा कि गुरु ही हृदय में भक्ति का बीज बोते हैं, जिसे राम नाम फलदायी बनाता है। बाबा हाथ योगी जी महाराज ने गुरु को ईश्वर तक पहुंचने का मार्गदर्शक बताते हुए कहा कि गुरु का आशीर्वाद जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है।महंत रघुवीर दास जी महाराज ने संत संग की महिमा बताते हुए कहा कि संतों का साथ जीवन को धर्ममय बना देता है। महंत विष्णु दास जी महाराज ने कहा कि गुरु स्मरण से जीवन में स्थिरता और शक्ति आती है, जबकि श्रीराम का नाम आत्मा को पवित्र करता है।महंत बिहारी शरण जी महाराज ने भगवान श्रीराम को त्याग, प्रेम और मर्यादा का प्रतीक बताते हुए उनके आदर्शों को जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी। महंत हरेंद्र दास जी महाराज ने गुरु सेवा को जीवन की सर्वोच्च साधना बताया, वहीं महंत जयराम दास जी महाराज ने मां गंगा को सनातन संस्कृति की जीवनधारा बताते हुए उनके महत्व का गुणगान किया।स्वामी अंकित शरण जी महाराज ने गुरु और गंगा दोनों को जीवन शुद्ध करने वाले तत्व बताते हुए कहा कि इनका आशीर्वाद जीवन को सफल बनाता है। महंत सूरज दास जी महाराज ने भक्ति, सेवा, साधना और सत्संग को जीवन का वास्तविक उद्देश्य बताया।इस अवसर पर बड़ी संख्या में संत-महात्मा, मठ-मंदिरों से आए श्रद्धालु एवं भक्तगण उपस्थित रहे। संपूर्ण परिसर वेद मंत्रों, राम नाम संकीर्तन और जय गंगे के उद्घोष से आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा। यह आयोजन श्रद्धा, भक्ति और सनातन संस्कृति के दिव्य संगम का अद्भुत उदाहरण बनकर सभी के हृदय में अमिट छाप छोड़ गया।

