उपराष्ट्रपति ने एम्स ऋषिकेश के 6वें दीक्षांत समारोह को किया संबोधित, स्नातकों को दिया सेवा और राष्ट्रनिर्माण का संदेश

उपराष्ट्रपति ने एम्स ऋषिकेश के 6वें दीक्षांत समारोह को किया संबोधित, स्नातकों को दिया सेवा और राष्ट्रनिर्माण का संदेश
ऋषिकेश/देहरादून, उत्तराखंड।
उत्तराखंड की पावन देवभूमि में आगमन पर देश के उपराष्ट्रपति का भव्य स्वागत किया गया। उत्तराखंड के राज्यपाल एवं पुष्कर सिंह धामी ने उनका अभिनंदन करते हुए प्रदेश में स्वागत किया।
इसके उपरांत उपराष्ट्रपति ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश के 6वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। समारोह में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, शिक्षण स्टाफ और गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
स्नातकों को सेवा, सहानुभूति और ईमानदारी का संदेश
अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने स्नातक विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने पेशे में सहानुभूति, ईमानदारी और राष्ट्र-निर्माण के प्रति प्रतिबद्धता को सर्वोपरि रखें। उन्होंने कहा कि एक चिकित्सक केवल पेशेवर नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदार सेवक होता है, जिसका कार्य मानवता की सेवा करना है।
स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर जोर
उपराष्ट्रपति ने एम्स ऋषिकेश की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि संस्थान उत्तर भारत में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने एम्स के विस्तार और आधुनिक सुविधाओं के विकास की आवश्यकता पर भी बल दिया, ताकि अधिक से अधिक लोगों को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा मिल सके।
युवा डॉक्टरों से राष्ट्रहित में योगदान की अपेक्षा
उन्होंने कहा कि देश के युवा डॉक्टरों में अपार क्षमता है और वे अपने ज्ञान व कौशल के माध्यम से देश को सशक्त बना सकते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे केवल करियर तक सीमित न रहकर समाज और राष्ट्रहित में भी सक्रिय योगदान दें।
गरिमामय आयोजन में दिखा उत्साह
दीक्षांत समारोह के दौरान सफल छात्रों को डिग्रियां प्रदान की गईं। इस अवसर पर पूरा परिसर उत्साह और गर्व के माहौल से सराबोर रहा।
समारोह ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि चिकित्सा शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्ति का माध्यम नहीं, बल्कि समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण का महत्वपूर्ण आधार है।

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