निरंजनी अखाड़े के द्वारा हुआ महामंडलेश्वर, स्वामी कपिलानंद सरस्वती का भव्य पट्टाभिषेक

निरंजनी अखाड़े के द्वारा महामंडलेश्वर, स्वामी कपिलानंद सरस्वती का भव्य पट्टाभिषेक
हरिद्वार, 23 अप्रैल।
हरिद्वार में स्थित कनखल के जगद्गुरु आश्रम में आयोजित भव्य समारोह में श्री पंचायती अखाड़ा निरंजनी ने स्वामी कपिलानंद सरस्वती को महामंडलेश्वर पद पर आसीन किया। वैदिक मंत्रोच्चारण, तिलक, चादर और पुष्पवर्षा के साथ संपन्न हुए इस पट्टाभिषेक समारोह में देशभर के संतों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
संत परंपराओं को आगे बढ़ाने का संकल्प
समारोह की अध्यक्षता स्वामी राजराजेश्वराश्रम ने की। उन्होंने कहा कि स्वामी कपिलानंद सरस्वती अखाड़े की गौरवशाली परंपराओं को आगे बढ़ाते हुए धर्म और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्द्धन में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
वहीं स्वामी कैलाशानंद गिरी ने विश्वास जताया कि नए महामंडलेश्वर समाज में धर्म और अध्यात्म के प्रचार-प्रसार को नई दिशा देंगे।
महामंडलेश्वर पद के दायित्वों पर जोर
रविंद्रपुरी ने कहा कि महामंडलेश्वर का पद अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसके साथ कई जिम्मेदारियां जुड़ी होती हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि स्वामी कपिलानंद सरस्वती मानव कल्याण और आध्यात्मिक जागरूकता के कार्यों में अग्रणी भूमिका निभाएंगे।
विद्वता और सेवा भाव की सराहना
अखाड़े के संतों और पदाधिकारियों ने स्वामी कपिलानंद सरस्वती को विद्वान एवं कर्मनिष्ठ संत बताते हुए कहा कि वे परंपराओं के अनुरूप धर्म संस्कृति के प्रचार-प्रसार का दायित्व सफलतापूर्वक निभाएंगे।
नवनियुक्त महामंडलेश्वर का संकल्प
अपने संबोधन में स्वामी कपिलानंद सरस्वती ने सभी संतों और श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे पूर्ण निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ धर्म, संस्कृति और अध्यात्म के प्रचार-प्रसार के लिए कार्य करेंगे। साथ ही उन्होंने अखाड़े की उन्नति में अपना संपूर्ण योगदान देने का संकल्प लिया।
समारोह में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
इस अवसर पर विभिन्न अखाड़ों के संत-महात्मा, सामाजिक व धार्मिक नेता तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा और उत्साह से भर गया।

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