हरिद्वार में त्रि-दिवसीय ‘सद्भावना सम्मेलन’ का भव्य समापन, आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हुआ जनसैलाब
📍 हरिद्वार, 15 अप्रैल:
बैसाखी महोत्सव के पावन अवसर पर ऋषिकुल कॉलेज ग्राउंड, हरिद्वार में आयोजित त्रि-दिवसीय ‘सद्भावना सम्मेलन’ का आज अत्यंत गरिमामयी एवं भव्य समापन हुआ। सम्मेलन के अंतिम दिन हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने पूरे वातावरण को भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत कर दिया।
कार्यक्रम में देश-विदेश से आए भक्तों ने भजन-कीर्तन, सत्संग और प्रवचनों का भरपूर लाभ उठाया। विशाल जनसमूह के बावजूद आयोजन में अनुशासन और शांति की अद्भुत मिसाल देखने को मिली।
🕉️ मन ही सुख-दुख का आधार: पूज्य श्री विभु जी महाराज
सम्मेलन के अंतिम दिवस पर पूज्य श्री विभु जी महाराज ने ‘जीवन में सुख और दुख का आधार: मन’ विषय पर गहन एवं प्रेरणादायक प्रवचन दिए। उन्होंने बताया कि मनुष्य का मन ही उसके सुख और दुख का वास्तविक कारण होता है। यदि मन संयमित और सकारात्मक हो, तो कठिन परिस्थितियों में भी शांति और संतोष प्राप्त किया जा सकता है।
उनके विचारों ने विशेष रूप से युवाओं के मन में नई ऊर्जा और सकारात्मक सोच का संचार किया।
🌼 संतों की संगति ही सच्चा तीर्थ
अपने ओजस्वी संदेश में महाराज जी ने कहा कि जहाँ संतों का वास और प्रवास होता है, वह स्थान स्वयं तीर्थ बन जाता है। संतों की संगति से जीवन में नई दिशा मिलती है और आत्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।
उन्होंने यह भी कहा कि महापुरुषों के बताए मार्ग पर चलना ही उनकी सच्ची सेवा और सम्मान है।
🎶 भक्तिमय माहौल और अनुशासन की मिसाल
कार्यक्रम में प्रस्तुत भजन-कीर्तन ने पूरे वातावरण को दिव्यता से भर दिया। कलाकारों और भक्तों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने सभी को भाव-विभोर कर दिया।
भारी भीड़ के बावजूद अनुशासन और शांति का जो दृश्य देखने को मिला, वह सम्मेलन के ‘सद्भावना’ उद्देश्य को पूर्णतः दर्शाता है।
🤝 आयोजकों का संदेश
मानव उत्थान सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित इस सम्मेलन का उद्देश्य समाज में प्रेम, शांति और आध्यात्मिक जागरूकता का प्रसार करना रहा। आयोजन समिति ने कार्यक्रम की सफलता पर प्रशासन और सभी सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।
साथ ही, देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं से सद्भावना और भाईचारे का संदेश जन-जन तक पहुँचाने का आह्वान किया गया।
✨ समापन संदेश
सम्मेलन के अंत में यह संदेश दिया गया कि यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि मानवता, प्रेम और आपसी सौहार्द का एक सशक्त माध्यम है।
यहाँ से प्राप्त सकारात्मक ऊर्जा निश्चित रूप से समाज में शांति और भाईचारे की नई ज्योति प्रज्वलित करेगी।
हरिद्वार में त्रि-दिवसीय ‘सद्भावना सम्मेलन’ का भव्य समापन, आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हुआ जनसैलाब

