गीता कुटीर आश्रम में भव्य श्रीमद् भागवत कथा, श्रद्धालु हुए भाव-विभोर

गीता कुटीर आश्रम में भव्य श्रीमद् भागवत कथा, श्रद्धालु हुए भाव-विभोर
हरिद्वार की पावन धरा मां गंगा के तट पर स्थित गीता कुटीर आश्रम में पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) के शुभ अवसर पर भव्य श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। इस दिव्य कथा में दूर-दूर से आए श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित होकर कथा का श्रद्धापूर्वक श्रवण कर रहे हैं।
कथा व्यास ब्रह्मरात हरितोष जी महाराज ने प्रथम दिवस में श्रीमद् भागवत कथा के महत्व को बताते हुए कहा कि कथा का श्रवण करने से मनुष्य के जीवन में आध्यात्मिक जागरण होता है, पापों का नाश होता है और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है। उन्होंने यह भी समझाया कि कथा का श्रवण क्यों आवश्यक है और यह किस प्रकार मनुष्य के जीवन को श्रेष्ठ बनाती है।
कथा के दूसरे और तीसरे दिन महाराज जी ने विभिन्न दृष्टांतों के माध्यम से श्रीमद् भागवत के प्रसंगों का अत्यंत भावपूर्ण और भव्य वर्णन किया, जिसे सुनकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए।
चौथे दिन श्री कृष्ण जन्मोत्सव को अत्यंत धूमधाम और भक्ति भाव से मनाया गया। पूरा वातावरण भक्ति रस में डूब गया और श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
पांचवें दिन गोवर्धन पूजा एवं छप्पन भोग के दिव्य प्रसंग का वर्णन किया गया, वहीं छठे दिन रुक्मिणी विवाह का सुंदर एवं भावपूर्ण चित्रण किया गया। इन अवसरों पर श्रद्धालु भजन-कीर्तन करते हुए झूम उठे और नृत्य-गान के साथ आनंद में लीन हो गए।
इस पावन आयोजन के मुख्य यजमान कैलाश चंद्र गुप्ता जी एवं उनके परिवार सहित सभी भक्तगणों ने पूरे भाव और भक्ति के साथ कथा स्थल को सजाया और अपनी-अपनी सामर्थ्य के अनुसार सहयोग प्रदान किया।
कथा व्यास जी ने पुरुषोत्तम मास के महत्व को बताते हुए कहा कि इस पवित्र मास में भजन, पूजन और दान-पुण्य का विशेष महत्व है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि इस मास में अधिक से अधिक धार्मिक कार्य करें और अपने जीवन को धन्य बनाएं।
पूरे आयोजन के दौरान भक्तिमय वातावरण बना रहा और श्रद्धालु कथा का रसपान कर आत्मिक शांति का अनुभव करते रहे।

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