हरिद्वार, देवपुरा चौक। तीर्थ नगरी हरिद्वार स्थित गुरु मंडल आश्रम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का समापन अत्यंत भक्ति, श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। कथा के अंतिम दिवस पर भव्य भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में संत-महात्माओं और श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
कथा के दौरान भगवान श्री कृष्ण की दिव्य लीलाओं, उनकी महिमा और धर्मोपदेशों को श्रीमद्भागवत के माध्यम से भक्तों तक पहुंचाया गया। कथा श्रवण के दौरान श्रद्धालु भक्ति भाव में सराबोर दिखाई दिए और पूरे वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हुआ।
संतों का सम्मान और भंडारे की भव्यता
समापन अवसर पर आयोजित भंडारे में विभिन्न अखाड़ों और आश्रमों से पधारे संतों को ससम्मान भोजन कराया गया। इसके साथ ही उन्हें दक्षिणा एवं सम्मान देकर उनकी गरिमा का आदर किया गया। संत समाज की उपस्थिति से आयोजन और अधिक दिव्य एवं गौरवशाली बन गया।
भक्तों ने भी बड़े श्रद्धा भाव से सेवा कार्य में भाग लिया और प्रसाद वितरण में अपना सहयोग दिया। पूरे आयोजन में सेवा, समर्पण और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला।
भक्ति और सेवा का सुंदर समागम
इस पावन आयोजन का संचालन एवं व्यवस्था में संजय भंडारी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनके नेतृत्व में यह कार्यक्रम अत्यंत सुव्यवस्थित और सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
धर्म और संस्कृति का संदेश
श्रीमद्भागवत कथा के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएं केवल कथा नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाती हैं। सत्य, प्रेम, धर्म और करुणा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा इस कथा से मिलती है।
अंत में, संतों के आशीर्वचन और भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। यह आयोजन हरिद्वार की पावन भूमि पर धर्म, भक्ति और सेवा की एक अनुपम मिसाल बनकर सभी के हृदय में अमिट छाप छोड़ गया।
हरिद्वार में श्रीमद्भागवत कथा का भव्य समापन, भंडारे में संतों का हुआ सम्मान

