हरिद्वार। कनखल। हरिद्वार के दक्ष मार्ग स्थित पावन आश्रम में आयोजित महामंडलेश्वर पट्टाभिषेक समारोह आध्यात्मिक गरिमा, सनातन संस्कृति और गुरु-शिष्य परंपरा का अद्वितीय संगम बनकर सामने आया। यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भारतीय सनातन संस्कृति की जीवंतता और उसकी वैश्विक महिमा का सशक्त प्रतीक भी सिद्ध हुआ।इस पावन अवसर पर डॉ. हर्षिता नाथ भास्कर जी महाराज, साध्वी कोशिका नाथ एवं संदीपन नाथ जी को वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ संत समाज की साक्षी में विधिवत रूप से महामंडलेश्वर पद से अलंकृत किया गया। यह सम्मान उनके तप, त्याग, साधना और समाज सेवा के प्रति उनके समर्पित जीवन का प्रतीक है।गुरु गोरखनाथ की भक्ति और महिमा का संदेशसमारोह के दौरान अखाड़े के अध्यक्ष परमात्मा स्वरूप संजीवन नाथ महाराज ने अपने प्रेरणादायक उद्बोधन में गुरु गोरखनाथ जी की दिव्य महिमा का गुणगान करते हुए कहा:“गुरु गोरखनाथ जी की भक्ति वह शक्ति है, जो साधक के जीवन को अज्ञान से ज्ञान, और अशांति से परम शांति की ओर ले जाती है। उनकी कृपा से ही साधना सफल होती है और जीवन में आध्यात्मिक प्रकाश का उदय होता है।”उन्होंने आगे कहा:“गुरु गोरखनाथ जी केवल एक योगी नहीं, बल्कि सनातन धर्म की जीवंत चेतना हैं। उनकी परंपरा आज भी विश्वभर में धर्म, सेवा, और मानवता का संदेश दे रही है।”सनातन परंपरा का उज्ज्वल स्वरूपयह समारोह इस बात का प्रमाण बना कि सनातन धर्म केवल परंपराओं तक सीमित नहीं, बल्कि एक जीवंत और प्रेरणादायक जीवन पद्धति है। गुरु परंपरा के सम्मान और योग्य संतों के अलंकरण से समाज में नई ऊर्जा और आध्यात्मिक जागरूकता का संचार होता है।हरिद्वार की पावन भूमि, जो ऋषियों-मुनियों की तपस्थली रही है, आज भी ऐसे आयोजनों के माध्यम से धर्म और संस्कृति की ज्योति को प्रज्वलित रखे हुए है।दिव्यता से परिपूर्ण वातावरणवैदिक मंत्रों की गूंज, संतों के आशीर्वचन और श्रद्धालुओं की आस्था ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। यह आयोजन न केवल संत समाज के लिए, बल्कि समस्त श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया।अंत में भारत माता के जयघोष और संतों के आशीर्वाद के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। गुरु गोरखनाथ जी की परंपरा से प्रेरित यह भव्य समारोह सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार और आध्यात्मिक चेतना को नई दिशा देने वाला एक अविस्मरणीय अध्याय बन गया।
हरिद्वार में भव्य महामंडलेश्वर पट्टाभिषेक: गुरु गोरखनाथ परंपरा की दिव्य छटा

