ब्रिटिश संसद में गूंजा शांतिकुंज का संदेश “नैतिक AI” पर डॉ. चिन्मय पण्ड्या का वैश्विक संबोधन
हरिद्वार, 30 अप्रैल।
यूरोप प्रवास के दौरान डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने लंदन स्थित ब्रिटिश संसद में आयोजित ‘पीस कॉन्क्लेव’ में भारत की आध्यात्मिक चेतना और “नैतिक AI” के सिद्धांतों को वैश्विक मंच पर प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
एल्गोरिदम नहीं, ‘नैतिक विवेक’ से सुरक्षित होगा भविष्य
डॉ. पण्ड्या ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का विकास तभी सार्थक है जब उसमें मानवीय संवेदनाएँ और नैतिकता शामिल हों।
उन्होंने पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य के वैज्ञानिक अध्यात्म के सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए कहा कि:
“तकनीकी प्रगति तब तक अधूरी और संभावित रूप से विनाशकारी है, जब तक वह नैतिक मूल्यों से न जुड़ी हो।”
वैश्विक विशेषज्ञों की उपस्थिति
सम्मेलन का उद्घाटन लॉर्ड कृष रावल (OBE), निदेशक – फाउंडेशन फॉर इंटरनेशनल लॉ द्वारा किया गया।
कार्यक्रम में कई अंतरराष्ट्रीय हस्तियाँ शामिल रहीं:
ओलिवर रिची – AI नीति निर्माण पर जोर
प्रो. रॉबर्ट ट्रेजर – AI गवर्नेंस पर विचार
किशोर लुल्ला – सामाजिक प्रभाव पर दृष्टिकोण
लॉर्ड रसेल रूक – नैतिक AI की आवश्यकता पर बल
🕊️ आध्यात्म और तकनीक का संगम
डॉ. पण्ड्या ने कहा कि भविष्य की सुरक्षा केवल तकनीकी एल्गोरिदम पर निर्भर नहीं हो सकती, बल्कि इसके लिए मनुष्य के भीतर “नैतिक विवेक” का जाग्रत होना अनिवार्य है।
हरिद्वार से वैश्विक मंच तक
इस आयोजन ने शांतिकुंज और हरिद्वार की आध्यात्मिक परंपराओं को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान दिलाई।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने सभी विशिष्ट अतिथियों को युग साहित्य एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।
निष्कर्ष
यह आयोजन भारत के आध्यात्मिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक के समन्वय का एक सशक्त उदाहरण बनकर उभरा, जो यह संदेश देता है:
AI का भविष्य केवल बुद्धिमत्ता नहीं, बल्कि नैतिकता और विवेक से सुरक्षित होगा।

