गुरु कृपा से जीवन होता है धन्य — भूपतवाला में विशाल संत समागम एवं भंडारे का भव्य आयोजन

गुरु कृपा से जीवन होता है धन्य — भूपतवाला में विशाल संत समागम एवं भंडारे का भव्य आयोजन
“गुरु ही वह दिव्य ज्योति हैं, जो अज्ञान के अंधकार को मिटाकर आत्मा को परम सत्य का मार्ग दिखाती है।”
हरिद्वार के भूपतवाला स्थित मुखिया गली में सतगुरु ईश्वर कृपा धर्म कुटी में प्रातः स्मरणीय गुरु भगवान की पावन पुण्य स्मृति के उपलक्ष्य में एक भव्य संत समागम एवं विशाल संत भंडारे का आयोजन अत्यंत श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ संपन्न हुआ। इस दिव्य अवसर पर दूर-दूर से आए संत-महात्माओं एवं श्रद्धालु भक्तों ने गुरु चरणों में अपनी श्रद्धा सुमन अर्पित किए और वातावरण को गुरु महिमा के जयघोष से भक्तिमय बना दिया।
गुरु महिमा का हुआ भावपूर्ण वर्णन
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित संतों ने गुरु की महिमा का विस्तारपूर्वक वर्णन करते हुए कहा कि गुरु ही मानव जीवन के अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं। गुरु का सान्निध्य व्यक्ति को सत्य, धर्म और मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर करता है तथा उनके बिना जीवन की वास्तविक सार्थकता संभव नहीं है।
संतों के प्रेरणादायी उद्बोधन
परम पूज्य महंत श्री मक्कन सिंह जी महाराज ने अपने श्रीमुख से कहा कि गुरु का स्थान संसार में सर्वोच्च है। गुरु ही जीव को ईश्वर से जोड़ने का सशक्त माध्यम होते हैं और उनके उपदेश जीवन को नई दिशा प्रदान करते हैं।
महंत संत अमरीक सिंह जी महाराज ने गुरु और भगवान की अनंत महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि जो व्यक्ति गुरु की शरण में जाता है, वह जीवन के सभी कष्टों से पार होकर आत्मिक शांति को प्राप्त करता है।
महंत श्री इंद्रदास जी महाराज ने कहा कि गुरु केवल ज्ञानदाता ही नहीं, बल्कि जीवन के सच्चे मार्गदर्शक होते हैं। उनके बताए मार्ग पर चलकर ही मनुष्य जीवन को सफल बनाया जा सकता है।
श्री सतपाल जी ने अपने विचारों में कहा कि गुरु का स्मरण और सेवा मनुष्य को ईश्वर की कृपा का पात्र बनाती है। गुरु की महिमा शब्दों में नहीं, बल्कि अनुभव में समाई होती है।
महंत श्री रविदेव जी महाराज ने अपने उद्बोधन में बताया कि गुरु कृपा से ही भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का उदय होता है और गुरु का जीवन समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बनता है।
भक्ति भाव के साथ संपन्न हुआ संत भंडारा
कार्यक्रम के समापन पर विशाल संत भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें सभी संत-महात्माओं एवं श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर गुरु चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित की। पूरे परिसर में भक्ति, श्रद्धा और गुरु महिमा का अद्भुत वातावरण बना रहा।
विशेष उपस्थिति
इस पावन अवसर पर कोठारी महंत राघवेंद्र दास महाराज, महंत रविदेव महाराज, महामंडलेश्वर राम मुनि महाराज, महंत सुतीक्ष्ण मुनि महाराज, मंडलेश्वर श्याम दास महाराज, महंत दिनेश दास महाराज, स्वामी रविंदर दास महाराज सहित अनेक संत-महापुरुष एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्त उपस्थित रहे।
समापन संदेश:
“गुरु की कृपा से ही जीवन में सच्चा ज्ञान, शांति और मोक्ष प्राप्त होता है — गुरु ही जीवन की सबसे बड़ी संपदा हैं।”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!