भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की ने विकसित की एरोजेल-आधारित अत्याधुनिक थर्मल इंसुलेशन तकनीक

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की ने विकसित की एरोजेल-आधारित अत्याधुनिक थर्मल इंसुलेशन तकनीक
‘मेक-इन-इंडिया’ पहल को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाते हुए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की (आईआईटी रुड़की) के वैज्ञानिकों ने एरोजेल-आधारित उन्नत थर्मल इंसुलेशन प्रौद्योगिकी विकसित की है। यह तकनीक हल्के वजन, उच्च-प्रदर्शन और ऊर्जा-कुशल इंसुलेशन समाधान प्रदान करती है, जो उद्योगों और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है।
एरोजेल को दुनिया के सबसे हल्के ठोस पदार्थों में गिना जाता है। इसकी सूक्ष्म छिद्रयुक्त संरचना इसे उत्कृष्ट ताप-रोधी (थर्मल इंसुलेशन) गुण प्रदान करती है। आईआईटी रुड़की द्वारा विकसित यह स्वदेशी तकनीक अत्यधिक तापमान परिस्थितियों में भी प्रभावी प्रदर्शन करने में सक्षम है, जिससे ऊर्जा की बचत के साथ-साथ परिचालन लागत में भी कमी आती है।
‘मेक-इन-इंडिया’ को मिलेगा बढ़ावा, ऊर्जा दक्षता में होगी वृद्धि
यह स्वदेशी नवाचार निर्माण, पेट्रोकेमिकल, अंतरिक्ष, रक्षा, ऑटोमोबाइल और कोल्ड-चेन जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उपयोगी साबित हो सकता है। पारंपरिक इंसुलेशन सामग्री की तुलना में एरोजेल-आधारित समाधान अधिक पतले, टिकाऊ और बेहतर ताप-रोधक हैं, जिससे सीमित स्थान में भी बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक न केवल आयात पर निर्भरता कम करेगी, बल्कि भारत को उन्नत सामग्री विज्ञान के क्षेत्र में वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भी मजबूत बनाएगी। ‘मेक-इन-इंडिया’ के तहत विकसित यह उपलब्धि आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो स्वदेशी अनुसंधान और नवाचार की क्षमता को दर्शाती

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