श्रद्धा, दिव्यता और राष्ट्रभाव के साथ सम्पन्न हुआ“गुरुदेव समाधि मन्दिर–मूर्ति स्थापना महोत्सव” का भव्य समापन

हरिद्वार स्थित सप्तऋषि मैदान में आयोजित त्रिदिवसीय “गुरुदेव समाधि मन्दिर–मूर्ति स्थापना महोत्सव” (04, 05 एवं 06 फरवरी 2026) का समापन आज श्रद्धा, दिव्यता और भव्यता के साथ सम्पन्न हुआ। यह महोत्सव भारत माता मन्दिर के संस्थापक, भगवद्पादाचार्य आदि शंकराचार्य परम्परा के दिव्य संवाहक, वैदिक सनातन धर्म संस्कृति के प्रखर प्रसारक, पद्मभूषण से अलंकृत ब्रह्मलीन परम पूज्य श्री स्वामी सत्यमित्रानन्द गिरि जी महाराज की दिव्य स्मृतियों को चिरस्थायी स्वरूप प्रदान करने हेतु आयोजित किया गया।यह त्रिदिवसीय आयोजन भारत माता मन्दिर–समन्वय सेवा ट्रस्ट एवं भारत माता जनहित ट्रस्ट के अध्यक्ष, श्रीमत्परमहंस परिव्राजकाचार्य, श्रोत्रिय-ब्रह्मनिष्ठ, अनन्तश्रीविभूषित जूनापीठाधीश्वर, आचार्यमहामण्डलेश्वर परम पूज्य श्री स्वामी अवधेशानन्द गिरि जी महाराज के पावन सान्निध्य में सम्पन्न हुआ।केन्द्रीय रक्षामंत्री एवं मुख्यमंत्री योगी की गरिमामयी उपस्थितिसमापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में केन्द्रीय रक्षामंत्री आदरणीय श्री राजनाथ सिंह जी तथा उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री एवं गोरक्ष पीठाधीश्वर परम पूज्य श्रीमहंत योगी आदित्यनाथ जी की विशेष उपस्थिति रही।विशिष्ट अतिथियों के रूप में उत्तराखण्ड के माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी, केन्द्रीय ऊर्जा तथा आवास एवं शहरी मंत्री आदरणीय श्री मनोहर लाल जी, परम पूज्य कार्ष्णि पीठाधीश्वर स्वामी श्री गुरूशरणानन्द जी महाराज, परम पूज्य निर्वाणपीठाधीश्वर स्वामी श्री विशोकानन्द जी महाराज, श्रीरामजन्मभूमि न्यास के कोषाध्यक्ष परम पूज्य स्वामी श्री गोविन्ददेव गिरि जी महाराज, उत्तराखण्ड विधानसभा की अध्यक्षा आदरणीया श्रीमती ऋतु खंडूरी जी, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री आदरणीय श्री ब्रजेश पाठक जी, मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री आदरणीय श्री कैलाश विजयवर्गीय जी, उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ जी, कैबिनेट मंत्री श्री गणेश जोशी जी तथा हरिद्वार सांसद श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत जी उपस्थित रहे।स्वामी सत्यमित्रानन्द गिरि जी का जीवन राष्ट्र और मानवता के लिए प्रेरणामुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि पूज्य गुरुदेव स्वामी सत्यमित्रानन्द गिरि जी महाराज ने समन्वय, सद्भाव और एकात्मता का दिव्य संदेश देकर राष्ट्र को नई दिशा दी। उन्होंने वनवासी एवं आदिवासी समाज के उत्थान हेतु अन्न, अक्षर और औषधि के माध्यम से व्यापक जनसेवा की। उनका जीवन त्याग, सेवा और राष्ट्रभक्ति का सजीव प्रतीक रहा।केन्द्रीय रक्षामंत्री श्री राजनाथ सिंह जी ने कहा कि ब्रह्मलीन पूज्य स्वामी सत्यमित्रानन्द गिरि जी महाराज ने सनातन संस्कृति, राष्ट्रचेतना और मानवता की सेवा को अपने जीवन का उद्देश्य बनाया। उन्होंने आध्यात्मिक साधना को सामाजिक सेवा से जोड़कर एक ऐसा जीवन-दर्शन दिया, जो पीढ़ियों तक समाज को प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने पूज्य स्वामी अवधेशानन्द गिरि जी महाराज को भी समाज और राष्ट्र के लिए प्रेरणास्रोत बताया।“समन्वय पुरस्कार” से सम्मानित हुए समाजसेवी चिकित्सकसमारोह में समन्वय सेवा न्यास एवं भारत माता मन्दिर द्वारा मानवता की निःस्वार्थ सेवा तथा जनजातीय एवं वनवासी क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाओं के उल्लेखनीय योगदान के लिए आदरणीय डॉ. अनुज सिंघल जी (सचिव, विवेकानन्द हेल्थ मिशन सोसायटी, उत्तराखण्ड) एवं आदरणीया डॉ. ताराश्री सिंघल जी (कार्यकारी निदेशक, स्वामी विवेकानन्द धर्मार्थ चिकित्सालय, धर्मावाला) को संयुक्त रूप से “समन्वय पुरस्कार” से सम्मानित किया गया।संत-संन्यासियों और हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थितिसमापन समारोह में महामण्डलेश्वर पूज्य श्री स्वामी अखिलेश्वरानन्द गिरि जी महाराज, महामण्डलेश्वर पूज्य श्री स्वामी ललितानन्द गिरि जी महाराज, पूज्य श्रीमहंत देवानन्द जी महाराज, महामण्डलेश्वर पूजनीया स्वामी नैसर्गिका गिरि जी सहित अनेक संत-महात्मा, भारत माता मन्दिर–समन्वय सेवा ट्रस्ट के सचिव श्री आई.डी. शास्त्री जी, वरिष्ठ न्यासीगण, शासन-प्रशासन के अधिकारी एवं हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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