हरिद्वार । दक्षिण काली मंदिर में होली का दिव्य उत्सव फाल्गुन मास की मधुर बयार, मंदिर प्रांगण में गूंजते शंख और घंटियों की पावन ध्वनि, चारों ओर बिखरी श्रद्धा और भक्ति की आभा — ऐसा अलौकिक दृश्य उपस्थित था जब दक्षिण काली मंदिर में होली का पावन पर्व बड़े ही श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। मंदिर को रंग-बिरंगे पुष्पों, आम्र-पल्लव और आकर्षक सजावट से सुसज्जित किया गया था। भक्तों के चेहरों पर आस्था का उजास और हृदय में माँ काली के प्रति अटूट प्रेम झलक रहा था।मंदिर प्रांगण में भजन-कीर्तन की मधुर स्वर लहरियाँ वातावरण को भक्तिमय बना रही थीं। ढोल, मंजीरे और करताल की ताल पर भक्त झूम उठे। रंग, गुलाल और फूलों की वर्षा के बीच ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो स्वयं देवगण भी इस उत्सव में सम्मिलित हो गए हों। श्रद्धालु एक-दूसरे को प्रेमपूर्वक रंग लगाकर “जय माँ काली” के उद्घोष से वातावरण को गुंजायमान कर रहे थे।
परम पूज्य स्वामी कैलाशानंद जी महाराज के सान्निध्य में भक्तिमय होलीइस पावन अवसर पर पीठाधीश्वर परम पूज्य श्री श्री 1008 स्वामी कैलाशानंद जी महाराज की गरिमामयी उपस्थिति ने उत्सव को और भी दिव्य बना दिया। महाराज श्री ने सभी संतों और भक्तों को आशीर्वाद देते हुए प्रेम, सद्भाव और भाईचारे का संदेश दिया। उनके करकमलों से जब गुलाल और पुष्पों की वर्षा हुई, तब पूरा वातावरण आनंद और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत हो उठा।महाराज श्री ने कहा कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि हृदयों को जोड़ने और मन के विकारों को दूर करने का पर्व है। उनके मार्गदर्शन में संतों एवं भक्तों ने फूलों की होली खेली, जिससे मंदिर परिसर सुगंधित और रंगमय हो गया। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो भक्ति, प्रेम और उत्साह के रंगों से संपूर्ण वातावरण आलोकित हो उठा हो।इस प्रकार दक्षिण काली मंदिर में मनाई गई होली केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि आध्यात्मिक एकता, श्रद्धा और आनंद का अनुपम संगम बन गई। 🌸✨

