सर्वोदय सत्संग समिति आश्रम में रहने को लेकर विवाद, कथा व्यास जयशंकर त्रिपाठी ने लगाए उत्पीड़न के आरोप
हरिद्वार। भूपतवाला स्थित भारत माता मंदिर के निकट सर्वोदय सत्संग समिति आश्रम में रहने को लेकर विवाद सामने आया है। प्रयागराज निवासी कथा व्यास जयशंकर त्रिपाठी ने आश्रम प्रबंधन से जुड़े कुछ लोगों पर अभद्र व्यवहार, मानसिक उत्पीड़न तथा कुटिया खाली करने के लिए दबाव बनाने के आरोप लगाए हैं।
कथा व्यास जयशंकर त्रिपाठी ने सर्वोदय सत्संग समिति आश्रम में परेशान किए जाने की कही बात
जयशंकर त्रिपाठी के अनुसार, करीब दस वर्ष पूर्व वह कथा वाचन के सिलसिले में सर्वोदय सत्संग समिति आश्रम पहुंचे थे। इस दौरान आश्रम की व्यवस्था से जुड़ी श्रीमती सरला शर्मा के व्यवहार एवं स्नेह से प्रभावित होकर उन्होंने हरिद्वार में रहने का मन बनाया। उनका कहना है कि प्रारंभिक बातचीत में आश्रम परिसर में उनके लिए एक कक्ष निर्माण की बात कही गई थी, जिसके लिए करीब आठ लाख रुपये खर्च होने की जानकारी दी गई थी।
त्रिपाठी ने बताया कि बाद में परिस्थितियों में बदलाव के बाद आश्रम में पहले से बने एक कमरे की मरम्मत कर उसे उनके उपयोग के लिए उपलब्ध कराने की बात कही गई। उनके अनुसार, इस व्यवस्था के लिए उन्होंने करीब चार वर्ष पूर्व दो लाख रुपये चेक के माध्यम से दिए थे। उनका दावा है कि उस समय उन्हें अपनी धर्मपत्नी के साथ आजीवन आश्रम में रहने का आश्वासन भी दिया गया था।
वर्तमान में उन्हें आश्रम की 20 नंबर कुटिया उपयोग के लिए दी गई थी। त्रिपाठी का कहना है कि वह वर्षभर आश्रम में नहीं रहते, बल्कि वर्ष में कुछ दिनों के लिए ही हरिद्वार आते हैं और सामान्यतः आठ से दस दिन तक प्रवास करते हैं। उनके मुताबिक, प्रवास के दौरान भोजन एवं अन्य व्यवस्थाओं के लिए वह अलग से भुगतान भी करते रहे हैं।
कथा व्यास जयशंकर त्रिपाठी का आरोप है कि पिछले कुछ समय से आश्रम से जुड़े कुछ सदस्य एवं अन्य संबंधित लोग उनसे कुटिया खाली करने के लिए कह रहे हैं। उनका आरोप है कि इस दौरान उनके साथ अभद्र व्यवहार भी किया गया, जिससे उन्हें मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि आश्रम में अन्य लोगों से भी राशि लेकर रहने की व्यवस्था किए जाने की बातें सामने आई हैं।
त्रिपाठी ने आश्रम प्रबंधन से मांग की है कि उन्हें और उनकी धर्मपत्नी को आश्रम में सम्मानपूर्वक रहने दिया जाए तथा उनके साथ किसी प्रकार का अभद्र व्यवहार न किया जाए। उन्होंने कहा कि हरिद्वार की पावन भूमि में जीवन के शेष समय को आध्यात्मिक वातावरण में बिताने की भावना से उन्होंने आश्रम से जुड़ाव बनाया था






