“जनता को असली मुद्दों से भटकाया जा रहा है: राव आफाक अली”
हरिद्वार, 12 अगस्त 2026।
जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष राव आफाक अली ने प्रेस क्लब, हरिद्वार में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे मूलभूत मुद्दों से भटकाने के लिए विभिन्न विवादों और नीतिगत कदमों में उलझा रही है।
राव आफाक अली ने अपनी बात को एक उदाहरण के माध्यम से समझाते हुए कहा कि जैसे एक परिवार का मुखिया अपनी अक्षमता छिपाने के लिए बच्चों को झूठे विवाद में उलझा देता है, ठीक उसी प्रकार सरकार भी जनता का ध्यान असली समस्याओं से हटाने का प्रयास कर रही है।
उन्होंने कहा कि आज़ादी के 80 वर्षों बाद भी देश में कई बुनियादी समस्याएँ जस की तस बनी हुई हैं। 2011 के बाद जनगणना नहीं कराई गई और अब तक ऐसी कोई एकल पहचान प्रणाली विकसित नहीं की जा सकी है, जिससे नागरिक गर्व से अपनी भारतीय पहचान साबित कर सकें।
आधार कार्ड पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि यह एक प्रकार का निगरानी तंत्र बन गया है, जो नागरिकों की निजी जानकारी सरकार तक पहुँचाता है। हालांकि उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि सरकार को आधार कार्ड को शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग, संपत्ति, निर्वाचन और परिवार से जोड़कर इसे नागरिकता का मुख्य प्रमाण बनाना चाहिए, ताकि लोगों को कई प्रकार की पहचान पत्रों की आवश्यकता न पड़े।
वोटर लिस्ट को लेकर भी उन्होंने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि वर्ष 2003 में वोटर लिस्ट को हिंदी से अंग्रेज़ी में परिवर्तित करने के कारण कई लोगों के नामों की स्पेलिंग में त्रुटियाँ हो गईं, जिससे आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने मांग की कि देश की अधिकांश जनता की सुविधा को ध्यान में रखते हुए वोटर लिस्ट हिंदी में ही रखी जाए और भारत में होने वाले सभी सरकारी कार्य राष्ट्रभाषा हिंदी में ही किए जाएँ।
राव आफाक अली ने कहा कि भारत “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना वाला देश है, लेकिन आज स्थिति यह है कि उन्हीं नागरिकों से उनकी भारतीयता का प्रमाण मांगा जा रहा है, जिनके पूर्वजों ने देश की आज़ादी के लिए संघर्ष किया।
उन्होंने सुझाव दिया कि नागरिकता और पहचान से जुड़े कार्यों को केवल BLO तक सीमित न रखकर लेखपाल, ग्राम पंचायत विकास अधिकारी और शिक्षकों जैसे जिम्मेदार एवं योग्य व्यक्तियों को भी शामिल किया जाए, ताकि कार्य की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।

