तुलसी मानस मंदिर में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, भक्ति भजनों और जयकारों से भक्तिमय हुआ वातावरण
हरिद्वार। भूपतवाला स्थित तुलसी मानस मंदिर में भावनगर, गुजरात से पधारे मुख्य यजमान श्री रमेश भाई के सानिध्य में परम पूज्य कथा व्यास राकेश प्रसाद शास्त्री जी महाराज के श्रीमुख से श्रीमद्भागवत कथा का पावन आयोजन किया गया। कथा का श्रवण करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्तजन पहुंचे। लगभग 150 से अधिक श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीहरि की भक्ति, कथा एवं आध्यात्मिक ज्ञान का लाभ प्राप्त किया।
कथा के दौरान श्रद्धालुओं को मानव जीवन के कल्याण के साथ-साथ धर्म, सदाचार, सेवा, भक्ति और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी गई। कथा के प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक जीवन के महत्व से अवगत कराया। वहीं भक्ति भजनों एवं भगवान के जयकारों से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठा।
इस अवसर पर भव्य शोभायात्रा भी निकाली गई, जिसमें श्रद्धालुओं ने उत्साह एवं श्रद्धाभाव के साथ सहभागिता की। शोभायात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान के जयकारे लगाए और संत-महात्माओं का आशीर्वाद प्राप्त किया।
मुख्य यजमान श्री रमेश भाई ने कहा कि “श्रीमद्भागवत कथा मानव कल्याण का सुधा रस है। इसके श्रवण मात्र से मनुष्य के जीवन में भक्ति, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। भागवत हमें केवल भगवान की कथा सुनाती ही नहीं, बल्कि जीवन को धर्म, सत्य, सेवा और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा भी देती है।”
वहीं श्री मुकेश भाई जानी दादा ने कहा कि “इस दिव्य एवं पावन कल्याणकारी कथा का श्रवण कर हमारा जीवन धन्य हो गया। श्रीमद्भागवत कथा के प्रत्येक प्रसंग में मानव जीवन के लिए एक गहरा संदेश छिपा हुआ है। भगवान की भक्ति और संतों का सत्संग मनुष्य को जीवन की वास्तविक दिशा प्रदान करता है।”
कथा व्यास परम पूज्य राकेश प्रसाद शास्त्री जी महाराज ने कहा कि “श्रीमद्भागवत महापुराण मानव जीवन को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाली दिव्य ज्ञानगंगा है। जिस प्रकार सूर्य अपने प्रकाश से अंधकार को दूर करता है, उसी प्रकार भगवान की कथा मनुष्य के अंतर्मन के अज्ञान और विकारों को दूर कर ज्ञान एवं सद्बुद्धि का प्रकाश करती है।”
उन्होंने कहा कि मनुष्य का जीवन केवल भौतिक सुख-सुविधाओं की प्राप्ति के लिए नहीं, बल्कि ईश्वर की भक्ति, मानव सेवा और परोपकार के लिए मिला है। कथा का वास्तविक उद्देश्य तभी सार्थक होता है, जब इसके संदेश को व्यक्ति अपने आचरण में उतारे। भगवान का नाम, संतों का सत्संग और जरूरतमंदों की सेवा मनुष्य के जीवन को सार्थक बनाने का मार्ग है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से प्रेम, करुणा, सत्य, त्याग और सद्भाव को अपने जीवन का आधार बनाने तथा समाज एवं मानव कल्याण में योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत का संदेश हमें ईश्वर की भक्ति के साथ मानव सेवा को भी जीवन की महत्वपूर्ण साधना के रूप में अपनाने की प्रेरणा देता है।
कथा के समापन अवसर पर श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से भगवान श्रीहरि के जयकारे लगाए। भव्य शोभायात्रा में भी श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। पूरे आयोजन के दौरान तुलसी मानस मंदिर परिसर श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना से सराबोर नजर आया।






