श्रीमद्भागवत कथा के समापन पर गूंजे जयकारे, हवन-यज्ञ के बाद हजारों श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया संत-भंडारे का प्रसाद

आचार्य प्रेमनारायण तिवारी ने किया श्रीमद्भागवत महापुराण के महात्म्य का वर्णन, संतों के सानिध्य में हुआ हवन एवं संत पंगतपितृपक्ष की अमावस्या पर श्री अन्नपूर्णा मंदिर में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, सात दिवसीय ज्ञान यज्ञ का श्रद्धा और भक्ति के साथ हुआ समापन

हरिद्वार, हरिपुर कलां। हरिपुर कलां स्थित श्री अन्नपूर्णा मंदिर, प्रेम विहार चौक में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ का शनिवार को धार्मिक उल्लास, श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ भव्य समापन हुआ। पितृपक्ष की अमावस्या के पावन अवसर पर हवन-यज्ञ, संतों के सानिध्य, संत पंगत और विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। इस दौरान हजारों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने भोजन प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित किया। पूरा मंदिर परिसर भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों और भक्ति के वातावरण से गुंजायमान रहा।अमेरिका निवासी श्री विजय मेहरा, श्री अपूर्व मेहरा एवं समस्त मेहरा परिवार के सौजन्य से आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान में कथा व्यास आचार्य श्री प्रेमनारायण तिवारी ने सात दिनों तक श्रीमद्भागवत महापुराण के विभिन्न प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन कर श्रद्धालुओं को धर्म, भक्ति, ज्ञान, वैराग्य और सदाचार का संदेश दिया। भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं और भागवत महापुराण की महिमा का श्रवण कर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।भागवत कथा मानव जीवन को देती है सही दिशा : आचार्य प्रेमनारायण तिवारीकथा व्यास आचार्य श्री प्रेमनारायण तिवारी ने श्रीमद्भागवत के महात्म्य का वर्णन करते हुए कहा कि भागवत कथा केवल धार्मिक प्रसंगों का श्रवण नहीं, बल्कि मानव जीवन को सही दिशा प्रदान करने वाली दिव्य प्रेरणा है। यह मनुष्य को सत्य, प्रेम, करुणा, सेवा और सदाचार के मार्ग पर चलने की सीख देती है। भगवान श्रीकृष्ण के आदर्शों को जीवन में अपनाकर व्यक्ति अपने परिवार और समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है। उन्होंने कहा कि ईश्वर के प्रति सच्ची श्रद्धा और निःस्वार्थ भाव से की गई सेवा ही जीवन को सार्थक बनाती है।सनातन संस्कृति और संस्कारों को सशक्त बनाते हैं धार्मिक आयोजन : विश्वात्मानंद जी महाराजइस अवसर पर विश्वात्मानंद जी महाराज ने कहा कि सनातन धर्म की परंपरा में श्रीमद्भागवत कथा का विशेष महत्व है। ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में आध्यात्मिक चेतना जागृत करने के साथ नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, संस्कारों और नैतिक मूल्यों से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। संतों का सानिध्य और सत्संग मनुष्य के विचारों को शुद्ध कर उसे धर्म, सेवा और सदाचार के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से कथा में प्राप्त शिक्षाओं को अपने दैनिक जीवन में अपनाने तथा समाज में प्रेम, सद्भाव और भाईचारे को मजबूत करने का आह्वान किया।हवन-यज्ञ में आहुतियां अर्पित कर की विश्व कल्याण की कामनासात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के समापन अवसर पर विधि-विधान के साथ हवन-यज्ञ संपन्न हुआ। श्रद्धालुओं ने यज्ञ में आहुतियां अर्पित कर विश्व कल्याण, सुख-समृद्धि, परिवार की खुशहाली और समाज में शांति की कामना की। इसके उपरांत संत-महात्माओं के सम्मान में संत पंगत आयोजित की गई। श्रद्धालुओं ने संतों का आशीर्वाद प्राप्त कर सेवा, समर्पण और सनातन परंपरा के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।पितृपक्ष की अमावस्या पर विशाल भंडारा, हजारों श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया प्रसादधार्मिक आयोजन के अंतर्गत पितृपक्ष की अमावस्या के अवसर पर संतों एवं भक्तों के लिए भव्य भंडारे का आयोजन किया गया। इसमें हजारों श्रद्धालुओं ने पहुंचकर भोजन प्रसाद ग्रहण किया। संतों की सेवा और श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण के माध्यम से सेवा, समर्पण एवं लोककल्याण की भावना को प्रमुखता दी गई। भंडारे में श्रद्धालुओं की सहभागिता ने आयोजन को और भी भव्य बना दिया।आयोजन में शामिल श्रद्धालुओं ने सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के सफल आयोजन के लिए मेहरा परिवार के प्रयासों की सराहना की। पूरे सप्ताह चले इस धार्मिक अनुष्ठान ने हरिपुर कलां के वातावरण को भक्तिमय बना दिया। हवन-यज्ञ, संत पंगत, विशाल भंडारे और संत-महात्माओं के आशीर्वाद के साथ श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ का श्रद्धापूर्वक समापन हुआ।

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