श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन गूंजा भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति का संदेशश्रीकृष्ण जन्मोत्सव प्रसंग पर झूम उठे श्रद्धालु, कथा व्यास पीयूष प्रसाद व्यास ने सुनाई भगवान श्रीकृष्ण की महिमाहरिद्वार। भूपतवाला स्थित आनंद स्वरूप आश्रम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन श्रीकृष्ण जन्मोत्सव प्रसंग ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की कथा के दौरान श्रद्धालु भक्ति में झूमते और नृत्य करते नजर आए। पूरा कथा पंडाल भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों से गूंज उठा और वातावरण भक्तिमय हो गया।गुजरात के राजकोट से आए श्रद्धालुओं द्वारा अपने परिवार एवं पितरों के आशीर्वाद की कामना से आयोजित इस श्रीमद्भागवत कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होकर भगवान श्रीहरि की कथा का श्रवण कर रहे हैं। कथा व्यास सुप्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय कथा वक्ता शास्त्री श्री पीयूष प्रसाद व्यास जी महाराज (साणथली, राजकोट, गुजरात) ने श्रीमद्भागवत के विभिन्न प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन करते हुए नरसिंह अवतार तथा भगवान श्रीकृष्ण की महिमा का विस्तार से वर्णन किया।कथा व्यास ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण मनुष्य के जीवन में आध्यात्मिक चेतना का संचार करता है। श्रद्धा और विश्वास के साथ कथा का श्रवण करने से व्यक्ति को पुण्य की प्राप्ति होती है और पितरों के प्रति श्रद्धा एवं तर्पण की भावना को बल मिलता है। उन्होंने कहा कि पितरों के आशीर्वाद से परिवार में सुख-शांति और मंगल की भावना बनी रहती है तथा शुभ कार्यों में सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है।उन्होंने कहा कि तीर्थस्थल पर श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण विशेष पुण्यदायी माना गया है। तीर्थ की पावन भूमि पर कथा श्रवण करने से व्यक्ति में ईश्वर के प्रति भक्ति और श्रद्धा और अधिक प्रगाढ़ होती है। उन्होंने श्रद्धालुओं को धर्म, सेवा, दान और सदाचार के मार्ग पर चलने का संदेश देते हुए कहा कि तीर्थस्थल पर किए गए सत्कर्म और दान का विशेष आध्यात्मिक महत्व है।भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति का संदेश देते हुए कथा व्यास ने कहा कि श्रीकृष्ण केवल आराध्य देव ही नहीं, बल्कि प्रेम, करुणा, धर्म और सत्य के प्रतीक हैं। उनके श्रीचरणों में सच्ची श्रद्धा रखने वाले भक्त के जीवन में सकारात्मकता और आध्यात्मिक चेतना का संचार होता है। भगवान श्रीकृष्ण के नाम का स्मरण मनुष्य को सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठाकर परम शांति की ओर ले जाता है।उन्होंने कहा कि जब मनुष्य सच्चे मन से भगवान श्रीकृष्ण की शरण ग्रहण करता है तो उसके भीतर से अहंकार, भय और नकारात्मकता दूर होने लगती है। श्रीमद्भागवत कथा हमें प्रेम, सदाचार, करुणा, सेवा और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। जैसे ही कथा व्यास ने श्रीकृष्ण जन्म का प्रसंग सुनाया, श्रद्धालु भावविभोर होकर झूमने लगे। भजन-कीर्तन और भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों से पूरा आश्रम परिसर भक्तिमय हो उठा।कथा के मुख्य यजमान धर्मेश भाई, लवजी भाई एवं राजेश भाई डोंगा, राजकोट (गुजरात) सहित समस्त डोंगा परिवार की ओर से कथा का आयोजन कराया जा रहा है। परिवारजनों ने कहा कि पितरों के आशीर्वाद और भगवान श्रीकृष्ण की कृपा की कामना के साथ आयोजित इस कथा का उद्देश्य अधिक से अधिक श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत के आध्यात्मिक संदेश से जोड़ना है।कथा में गुजरात से आए नेहा बहन डोंगा, मीनाक्षी बेन डोंगा, रित्विक बेन डोंगा, पूजा डोंगा, भुर्मिक बेन डोंगा, कीर्ति भाई, छायनी, भारत भाई सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु नियमित रूप से कथा का श्रवण कर रहे हैं।चौथे दिन कथा के समापन अवसर तक पूरे आश्रम परिसर में भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिकता का वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों के साथ कथा का आनंद लिया और श्रीहरि के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित की।
श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन गूंजा भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति का संदेश






