हरिद्वार। रेलवे रोड स्थित श्री गरीबदासीय सेवाश्रम ट्रस्ट में ब्रह्मलीन परमाध्यक्ष महामंडलेश्वर डॉ. स्वामी श्यामसुंदरदास शास्त्री महाराज की सातवीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि समारोह आयोजित किया गया। समारोह में सभी तेरह अखाड़ों के संत-महापुरुषों ने ब्रह्मलीन संत का भावपूर्ण स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
महामंडलेश्वर स्वामी परमात्म देव की अध्यक्षता में आयोजित समारोह के मुख्य अतिथि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ. रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन महामंडलेश्वर डॉ. स्वामी श्यामसुंदरदास शास्त्री महाराज त्याग, तपस्या और सेवा की प्रतिमूर्ति थे। वे सनातन धर्म एवं शास्त्र परंपरा के अग्रणी विद्वान होने के साथ-साथ संत समाज के प्रेरणास्रोत भी थे। उनका जीवन समाज के लिए सदैव अनुकरणीय रहेगा। उनके दिखाए मार्ग पर चलना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
महामंडलेश्वर स्वामी अनंतानंद एवं महामंडलेश्वर स्वामी रामनुज सरस्वती ने कहा कि ब्रह्मलीन स्वामी श्यामसुंदरदास शास्त्री महाराज दिव्य आत्मा और संत समाज के प्रेरणास्रोत थे। वे ज्ञान के विशाल सूर्य के समान थे। सनातन धर्म एवं संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।
विधायक मदन कौशिक ने कहा कि स्वामी हरिहरानंद, स्वामी रविदेव शास्त्री और स्वामी दिनेश दास अपने ब्रह्मलीन गुरुदेव डॉ. श्यामसुंदरदास शास्त्री महाराज की सेवा परंपरा को जिस प्रकार आगे बढ़ा रहे हैं, वह सभी के लिए अनुकरणीय है।
अध्यक्षता कर रहे महामंडलेश्वर स्वामी परमात्म देव ने कहा कि ब्रह्मलीन स्वामी श्यामसुंदरदास शास्त्री महाराज उदारवादी और सहृदय संत थे। उन्होंने अपना पूरा जीवन धर्म, अध्यात्म और समाज सेवा के लिए समर्पित किया। उनके आदर्श और विचार संत समाज तथा श्रद्धालुओं को सदैव प्रेरणा देते रहेंगे।
महामंडलेश्वर स्वामी रामेश्वरानंद सरस्वती एवं स्वामी निर्मलदास ने कहा कि सनातन धर्म-संस्कृति के प्रचार-प्रसार तथा समाज को अध्यात्म से जोड़ने में ब्रह्मलीन स्वामी डॉ. श्यामसुंदरदास शास्त्री महाराज ने अहम भूमिका निभाई। उनकी सेवा, साधना और धर्म के प्रति समर्पण को कभी भुलाया नहीं जा सकता।
इस अवसर पर महंत रविदेव महाराज, महंत दिनेश दास महाराज, महंत सुतीक्ष्ण मुनि महाराज, महामंडलेश्वर चिद्विलासानंद जी महाराज, महंत हरिदास महाराज, पंजाबी बाबा जी, कोतवाल कमल मुनि महाराज सहित बड़ी संख्या में संत-महापुरुष एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।

