150 वर्षों से अधिक पुरानी परंपरा का हुआ निर्वहन, पंजाब से पहुंचे करीब 300 संत-भक्त
हरिद्वार। श्रावण मास की अमावस्या के पावन अवसर पर श्री पंचायती बड़ा उदासीन अखाड़ा, राजघाट कनखल में हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी स्वर्गीय महंत संत दास जी महाराज की पुण्य स्मृति में भव्य भंडारे एवं प्रसाद वितरण का आयोजन किया गया। इस अवसर पर हरिद्वार के विभिन्न अखाड़ों एवं आश्रमों से संत-महंत, महामंडलेश्वर तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और गुरु महाराज को श्रद्धांजलि अर्पित की।
भव्य भंडारे का आयोजन स्वर्गीय महंत संत दास जी महाराज के शिष्य महंत योग मुनि महाराज के नेतृत्व में किया गया। अमृतसर, पंजाब से लगभग 300 संत एवं भक्त विशेष रूप से इस आयोजन में शामिल हुए। संतों एवं श्रद्धालुओं ने भोजन प्रसाद ग्रहण किया तथा गुरु महाराज की पुण्य स्मृति को नमन किया।
महंत योग मुनि महाराज ने कहा कि उनके गुरु महाराज का आशीर्वाद सदैव उनके ऊपर बना रहे, यही उनकी प्रार्थना है। उन्होंने कहा कि गुरु महाराज की स्मृति में जिस परंपरा का निर्वहन वर्षों से किया जा रहा है, उसे वह पूरी श्रद्धा और सेवा भाव के साथ आगे भी जारी रखेंगे। हर वर्ष हरिद्वार में इसी प्रकार भंडारे का आयोजन कर गुरु परंपरा और सनातन संस्कृति की सेवा करते रहेंगे।
उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल भंडारा नहीं, बल्कि गुरु भक्ति, सेवा और सनातन परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प है। गुरु महाराज की कृपा से यह सेवा निरंतर चलती रहे और आने वाली पीढ़ियां भी इस परंपरा को आगे बढ़ाएं, यही उद्देश्य है।
महापुरुष शरीर से जाते हैं, कीर्ति के रूप में सदैव जीवित रहते हैं : राघवेंद्र दास
इस अवसर पर कोठारी राघवेंद्र दास जी ने बताया कि अखाड़े में पूरे वर्ष कथा, भागवत, सत्संग और कीर्तन सहित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। श्रावण अमावस्या के अवसर पर प्रत्येक वर्ष विशेष भंडारे का आयोजन किया जाता है। उन्होंने कहा कि ऐसे महापुरुषों की स्मृतियों को जीवंत रखते हुए समाज में उनकी सेवा और विचारों को आगे बढ़ाया जाता है।
उन्होंने कहा कि महापुरुष शरीर से भले ही हमारे बीच न रहें, लेकिन उनकी कीर्ति, विचार और संस्कारों के रूप में वे सदैव समाज में जीवित रहते हैं। उनकी पुण्य स्मृति में होने वाले ऐसे आयोजन आने वाली पीढ़ियों को भी सेवा, भक्ति और सनातन परंपरा से जोड़ने का कार्य करते हैं।
संत-महंतों ने अर्पित की श्रद्धांजलि
भंडारे में हरिद्वार के विभिन्न अखाड़ों से संत-महंत एवं महामंडलेश्वर सहित बड़ी संख्या में साधु-संत पहुंचे। सभी ने स्वर्गीय महंत संत दास जी महाराज की पुण्य स्मृति में श्रद्धासुमन अर्पित किए और उनके प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। संतों ने गुरु महाराज का स्मरण करते हुए उनके आशीर्वाद की कामना की।
आयोजन में संत-महंतों एवं श्रद्धालुओं को परंपरा के अनुसार भोजन प्रसाद एवं दक्षिणा प्रदान की गई। पूरे कार्यक्रम के दौरान श्रद्धा, भक्ति और सेवा का भाव देखने को मिला।
बताया गया कि यह भंडारा परंपरा 150 वर्षों से भी अधिक समय से निरंतर चली आ रही है। गुरु परंपरा से जुड़े संतों और भक्तों द्वारा हर वर्ष इस परंपरा का पूरी श्रद्धा के साथ निर्वहन किया जाता है।
अंत में कोठारी राघवेंद्र दास जी ने आयोजन में शामिल होने वाले सभी संत-महात्माओं, महामंडलेश्वरों, भक्तों एवं श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सभी के सहयोग और सहभागिता से यह धार्मिक आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। उन्होंने सभी संतों एवं भक्तों को धन्यवाद देते हुए स्वर्गीय महंत संत दास जी महाराज की पुण्य स्मृति को नमन किया।

