हरिद्वार,ज्वालापुर। बहावलपुर समाज द्वारा आयोजित ज्योत महोत्सव (किस्ती लीला) का भव्य एवं ऐतिहासिक आयोजन ज्वालापुर नगर में अत्यंत श्रद्धा, उत्साह और धूमधाम के साथ शोभायात्रा के रूप में संपन्न हुआ। शोभायात्रा के दौरान पूरे नगर में भक्ति, आस्था और उल्लास का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सैकड़ों वर्षों से चली आ रही बहावलपुर समाज की गौरवशाली सांस्कृतिक एवं सामाजिक परंपरा का जीवंत प्रतीक है, जिसे समाज पीढ़ी-दर-पीढ़ी पूरी श्रद्धा और समर्पण के साथ आगे बढ़ाता आ रहा है।
इस अवसर पर राष्ट्रीय व्यापार मंडल के रजिस्टर्ड अध्यक्ष एवं पार्षद हरविंदर सिंह ने बहावलपुर समाज को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह शोभायात्रा समाज की गौरवशाली परंपरा, सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकता की मजबूत मिसाल है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन हमारी प्राचीन धरोहरों को जीवित रखने के साथ-साथ नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, संस्कारों और परंपराओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
हरविंदर सिंह एवं समाज के अध्यक्ष अशोक हंस ने कहा कि आज के तेजी से बदलते दौर में ऐसी परंपराएं युवाओं को संस्कृति, अनुशासन और सामूहिकता का संदेश देती हैं। बहावलपुर समाज जिस निष्ठा, समर्पण और अनुशासन के साथ किस्ती लीला का आयोजन करता आ रहा है, वह वास्तव में सराहनीय और अनुकरणीय है।
उन्होंने कहा कि यह परंपरा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक समरसता, संगठन और आपसी सहयोग की भावना को भी मजबूत करती है। उन्होंने समाज के सभी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और आयोजन से जुड़े सदस्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनके अथक प्रयासों से यह आयोजन भव्य, सफल और यादगार बन सका।
भव्य शोभायात्रा एवं आयोजन के दौरान समाज के अध्यक्ष अशोक हंस, प्रभु दयाल, अमित अरोड़ा, रमेश अरोड़ा, ओम प्रकाश विरमानी, देव राज बब्बर, राहुल बजाज, अमित बजाज, सचिन बजाज, हेमंत खुराना, दीपक हंस, खुश दयाल बब्बर, केवल बाजार, विजय विरमानी सहित अनेक गणमान्य सदस्य सक्रिय रूप से उपस्थित रहे। सभी ने आयोजन की व्यवस्थाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और कार्यक्रम को सफल बनाने में अपना योगदान दिया।
समाज के पदाधिकारियों ने कहा कि बहावलपुर समाज अपनी पुरानी परंपराओं को केवल संजोकर ही नहीं रख रहा, बल्कि उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाने का भी निरंतर प्रयास कर रहा है, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपने गौरवशाली इतिहास, संस्कारों और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी रहें।
ज्योत महोत्सव (किस्ती लीला) का यह आयोजन बहावलपुर समाज की एकता, श्रद्धा, परंपरा और सांस्कृतिक चेतना का प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आया।






