हरिपुर कला के कबीर आश्रम में संत समागम एवं भव्य भंडारा


गुरु के मार्गदर्शन से ही जीवन होता है सफल — संतों का प्रेरक संदेश
हरिद्वार (हरिपुर कला)।
हरिपुर कला स्थित कबीर आश्रम हरिपुर कला में संतों का भव्य समागम एवं विशाल भंडारे का आयोजन अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। इस पावन अवसर पर विभिन्न आश्रमों से संत-महात्माओं एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर कार्यक्रम को आध्यात्मिक ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
कार्यक्रम में ओम प्रकाश दास (सिरसा, हरियाणा) विशेष रूप से पधारे। साथ ही गुरु कृपा आश्रम से जुड़े संतगण एवं सत स्वरुप शास्त्री (चौरा आश्रम, सहारनपुर) सहित अन्य आश्रमों से आए संत-महात्माओं ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति से आयोजन की शोभा बढ़ाई।
भंडारे में संतों एवं भक्तों ने विधि-विधानपूर्वक प्रसाद ग्रहण किया। आश्रम परिसर में भक्ति-भाव, सेवा और समर्पण का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह के साथ सेवा कार्यों में भाग लिया।
इस अवसर पर संतों ने गुरु महिमा का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि गुरु के बिना मानव जीवन दिशाहीन हो जाता है। गुरु ही शिष्य को अज्ञान रूपी अंधकार से निकालकर ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाते हैं। उन्होंने कहा कि गुरु केवल धार्मिक शिक्षा ही नहीं देते, बल्कि जीवन जीने की कला, सदाचार, संयम और सेवा का मार्ग भी सिखाते हैं।
संतों ने अपने प्रवचनों में बताया कि गुरु का मार्गदर्शन व्यक्ति को सत्य, प्रेम और करुणा के पथ पर अग्रसर करता है। गुरु की कृपा से ही मनुष्य अपने भीतर छिपी दिव्य शक्ति को पहचान पाता है और ईश्वर की प्राप्ति की ओर अग्रसर होता है। उन्होंने कहा कि गुरु हमें सत्संग, सेवा और साधना के माध्यम से आत्मिक उन्नति का मार्ग दिखाते हैं।
संतों ने उपस्थित श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे गुरु के बताए मार्ग पर चलते हुए मानव सेवा, सद्भाव और नैतिक मूल्यों को अपने जीवन में अपनाएं। गुरु का सान्निध्य जीवन को अनुशासित, संयमित और उद्देश्यपूर्ण बनाता है।
कार्यक्रम के अंत में सभी श्रद्धालुओं ने गुरु चरणों में नमन कर आशीर्वाद प्राप्त किया तथा धर्म, सेवा और सदाचार के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। पूरे आयोजन में अनुशासन, श्रद्धा और सेवा भाव की सुंदर झलक देखने को मिली, जिसने वातावरण को पूर्णतः आध्यात्मिक बना दिया।

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