भावनगर से करीब 150-200 श्रद्धालुओं ने मां गंगा की पावन धरा पर किया कथा श्रवण, कथा व्यास राकेश प्रसाद शास्त्री ने सुनाया विवाह का भावपूर्ण दृष्टांत
हरिद्वार। भूपतवाला स्थित तुलसी मानस मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह उत्सव धूमधाम एवं श्रद्धाभाव के साथ मनाया गया। कथा के दौरान जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मिणी के विवाह का प्रसंग आया, पूरा कथा पंडाल भक्ति और उल्लास से गूंज उठा। श्रद्धालु भजनों पर झूमते हुए भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे लगाने लगे।
भावनगर, गुजरात से मुख्य यजमान रमेश भाई लगभग 150 से 200 श्रद्धालुओं को साथ लेकर मां गंगा की पावन धरा हरिद्वार पहुंचे हैं। गुजरात से आए श्रद्धालुओं ने श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने के साथ मां गंगा में स्नान किया तथा हरिद्वार के विभिन्न मंदिरों में दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। श्रद्धालुओं ने कहा कि मां गंगा की पावन धरा पर आकर श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करना उनके लिए अत्यंत सौभाग्य और आध्यात्मिक अनुभूति का विषय है। उन्होंने कहा कि हरिद्वार की आध्यात्मिक ऊर्जा ने उनके मन को शांति और भक्ति से भर दिया है।
कथा व्यास राकेश प्रसाद शास्त्री जी ने श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह का भावपूर्ण दृष्टांत सुनाते हुए कहा कि रुक्मिणी भगवान श्रीकृष्ण को अपने आराध्य और पति के रूप में स्वीकार कर चुकी थीं। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण को संदेश भेजकर उनसे अपने उद्धार की प्रार्थना की। भगवान श्रीकृष्ण ने भक्त की पुकार स्वीकार करते हुए रुक्मिणी का हरण किया और विधि-विधान के साथ उनसे विवाह किया। यह प्रसंग बताता है कि जब भक्त पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान की शरण में जाता है, तो भगवान अपने भक्त की पुकार अवश्य सुनते हैं।
उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल कथा श्रवण का माध्यम नहीं, बल्कि मनुष्य को धर्म, भक्ति, सदाचार और ईश्वर के प्रति समर्पण का मार्ग दिखाने वाली दिव्य साधना है। भागवत कथा के श्रवण और भगवान के नाम-स्मरण से मनुष्य के भीतर सकारात्मक विचारों का संचार होता है तथा जीवन में आध्यात्मिक चेतना जागृत होती है।
कथा के छठे दिन गुजरात भावनगर से आए श्रद्धालुओं का सम्मान भी किया गया और उन्हें पुरस्कार प्रदान कर उत्साहवर्धन किया गया। श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह के अवसर पर आयोजित उत्सव में श्रद्धालुओं ने भक्ति गीतों और भजनों पर नृत्य कर अपनी प्रसन्नता व्यक्त की। पूरा वातावरण भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों और भक्तिमय भजनों से गूंजायमान रहा।
इस अवसर पर गुजरात से आए श्रद्धालुओं ने कहा कि हरिद्वार में मां गंगा के दर्शन, गंगा स्नान और श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण उनके लिए जीवन का अविस्मरणीय आध्यात्मिक अनुभव है। उन्होंने कहा कि कथा के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति और जीवन के गूढ़ संदेशों को समझने का अवसर प्राप्त हो रहा है।






