गंगा नहीं सिखाती जात-पात और भेदभाव, मानवता व सेवा का मार्ग अपनाएं : सतपाल महाराज
ऋषिकुल मैदान में सतपाल महाराज के 75वें जन्मदिवस समारोह का भव्य शुभारंभ, हजारों श्रद्धालुओं ने किया जोरदार स्वागत
हरिद्वार, 20 सितम्बर। आध्यात्मिक गुरु एवं उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज का 75वां जन्मदिवस श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के वातावरण में मनाया जा रहा है। जन्मदिवस के उपलक्ष्य में ऋषिकुल मैदान में आयोजित दो दिवसीय भव्य समारोह का रविवार को शुभारंभ हुआ। विशाल पंडाल में आयोजित कार्यक्रम में सतपाल महाराज के पहुंचते ही हजारों श्रद्धालुओं एवं अनुयायियों ने उनका जोरदार स्वागत किया। इस दौरान संगीतमयी एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने समारोह को और भव्य बना दिया। कार्यक्रम में उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति की मनोहारी झलक भी देखने को मिली।
श्रद्धालुओं को आशीर्वचन प्रदान करते हुए सतपाल महाराज ने कहा कि हरिद्वार का देवभूमि उत्तराखंड में विशेष आध्यात्मिक एवं धार्मिक महत्व है। मां गंगा संपूर्ण संसार को निर्मलता, पवित्रता और अविरलता का संदेश देती हैं। उन्होंने कहा कि गंगा से प्रेरणा लेकर हमें जात-पात और भेदभाव से ऊपर उठते हुए देश और समाज के कल्याण के लिए कार्य करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारतीय मनीषियों ने सदैव संसार को मानवता, सेवा और अध्यात्म का मार्ग दिखाया है। अध्यात्म के माध्यम से ही व्यक्ति के चरित्र का निर्माण होता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से धर्म और अध्यात्म के मार्ग पर चलते हुए राष्ट्रहित एवं समाजहित में योगदान देने का आह्वान किया।
सतपाल महाराज ने कहा कि सनातन संस्कृति भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को भारतीय परंपराओं, संस्कारों और जीवन मूल्यों का दर्शन कराती है। मां गंगा की पवित्रता, निर्मलता और अविरल धारा करोड़ों श्रद्धालुओं को हरिद्वार की ओर आकर्षित करती है। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड की मान-मर्यादा, आध्यात्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को अक्षुण्ण बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है।
समारोह के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्ति एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लिया। पूरे परिसर में धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण बना रहा।
इस अवसर पर सतपाल महाराज की धर्मपत्नी अमृता रावत, उनके पुत्र विभू महाराज, सुयश महाराज, पुत्रवधू आराध्या रावत, मोहिना कुमारी, रीवा राजघराने से पुष्पराज भूदेव, रागिनी सिंह, विधायक दिव्य राजसिंह, गढ़वाल कमिश्नर आनंद स्वरूप, पर्यटन सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल सहित हजारों श्रद्धालु एवं अनुयायी मौजूद रहे।






