श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर भक्ति में डूबे श्रद्धालु, गूंजे “नंद के आनंद भयो” के जयकारे


श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर भक्ति में डूबे श्रद्धालु, गूंजे “नंद के आनंद भयो” के जयकारे

हरिद्वार। भूपतवाला स्थित मुकामी भवन में श्रीमती लक्ष्मी नारायण देवी धर्म सेतु ट्रस्ट द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ के दौरान भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का प्रसंग अत्यंत श्रद्धा, उल्लास और भक्ति भाव के साथ मनाया गया।

कथा व्यास प्रातः स्मरणीय परम पूज्य ज्योतिर्विद पंडित नंदू जी महाराज जड़जा जी ने भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य अवतरण का हृदयस्पर्शी एवं भावपूर्ण वर्णन किया। उनके मुखारविंद से निकले शब्दों ने समूचे कथा पंडाल को भक्तिरस से सराबोर कर दिया।

उन्होंने अपने प्रवचन में कहा कि जब-जब धर्म की हानि और अधर्म का विस्तार होता है, तब-तब भगवान अपने भक्तों की रक्षा और धर्म की स्थापना के लिए अवतार धारण करते हैं। श्रीकृष्ण का जन्म केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि सत्य, प्रेम, करुणा और धर्म की विजय का दिव्य संदेश है।

जैसे ही श्रीकृष्ण जन्म का प्रसंग आया, कथा पंडाल में भक्ति और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्रद्धालु “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के जयघोषों के साथ झूमने, नाचने और गाने लगे। वातावरण इतना भक्तिमय हो गया कि उपस्थित जनसमूह स्वयं को वृंदावन की पावन गलियों में अनुभव करने लगा।

इस अवसर पर प्रस्तुत भक्ति गीत—
“नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की,
हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की।
गोकुल में बाजे बधैया, आई आज शुभ घड़ी,
देवों ने पुष्प बरसाए, छाई मंगल की लड़ी।”
—ने सभी श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम में श्रीमद्भागवत कथा के यजमान श्री राधेश्याम जी, श्रीमती उमा देवी जी, श्री बाबूलाल जी, श्रीमती मीना देवी जी, श्री अशोक जी, श्रीमती जुगल अग्रवाल जी, श्री बनवारी लाल जी एवं श्रीमती यशोदा जी सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने कथा श्रवण कर अलौकिक आनंद की अनुभूति की।

श्रद्धालुओं ने बताया कि कथा के माध्यम से उन्हें न केवल आध्यात्मिक शांति प्राप्त हो रही है, बल्कि जीवन को धर्ममय और सकारात्मक बनाने की प्रेरणा भी मिल रही है।

पूरे कार्यक्रम के दौरान कथा पंडाल भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों, भजन-कीर्तन और भावविभोर भक्ति से गुंजायमान रहा। उपस्थित भक्तों ने कथा व्यास पंडित नंदू जी महाराज जड़जा जी के श्रीमुख से प्रसारित अमृतमयी कथा को जीवन के लिए प्रेरणादायी बताते हुए इसे आत्मिक कल्याण का श्रेष्ठ माध्यम बताया।

श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की इस पावन बेला ने सभी श्रद्धालुओं को भक्ति, प्रेम और आनंद के दिव्य सागर में डुबो दिया।

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