भक्ति रस में कृष्णमय हुआ तुलसी मानस मंदिर, छठे दिवस रुक्मणी विवाह प्रसंग ने बांधा समां

भक्ति रस में कृष्णमय हुआ तुलसी मानस मंदिर, छठे दिवस रुक्मणी विवाह प्रसंग ने बांधा समां

हरिद्वार, भूपतवाला। हरिद्वार के भूपतवाला स्थित प्रसिद्ध श्री तुलसी मानस मंदिर इन दिनों पूर्ण रूप से भक्ति रस में सराबोर है। पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर आयोजित श्रीमद्भागवत सप्ताह में प्रतिदिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। प्रातः स्मरणीय कथा व्यास परम पूज्य, परम वंदनीय, परम तपस्वी स्वामी कामेश्वर पुरी जी महाराज के श्रीमुख से बह रही श्रीमद्भागवत कथा की अमृत वर्षा से संपूर्ण वातावरण कृष्णमय हो उठा है।

स्वामी कामेश्वर पुरी जी महाराज, जो कि ब्रह्मलीन परम पूज्य सद्गुरुदेव अनन्त श्री विभूषित वरिष्ठ महामण्डलेश्वर बालयोगी स्वामी अर्जुनपुरी जी महाराज के कृपापात्र शिष्य हैं, अपने ओजस्वी एवं भावपूर्ण प्रवचनों से श्रद्धालुओं के हृदय को स्पर्श कर रहे हैं।

श्रीमद्भागवत सप्ताह के छठे दिवस कथा में रुक्मणी विवाह का अत्यंत सुंदर एवं भावपूर्ण प्रसंग प्रस्तुत किया गया। इस दिव्य प्रसंग को सुनाते हुए स्वामी जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मणी के पावन मिलन को सच्चे प्रेम, समर्पण और अटूट श्रद्धा का प्रतीक बताया। कथा के मधुर वर्णन और भावपूर्ण शैली ने उपस्थित भक्तों को भावविभोर कर दिया, जिससे पूरा मंदिर परिसर “राधे-कृष्ण” के जयघोष से गूंज उठा।

अपने दिव्य उद्बोधन में स्वामी जी महाराज ने कहा कि जो भक्त सच्चे मन, निष्कपट भाव और पूर्ण समर्पण के साथ भगवान का स्मरण करता है, उसके जीवन की हर बाधा स्वयं प्रभु दूर कर देते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान अपने भक्तों के प्रेम से बंध जाते हैं और उनके जीवन को सरल एवं सफल बना देते हैं।

कथा के दौरान भजन-कीर्तन ने वातावरण को और अधिक भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालु भक्ति भाव में झूमते हुए प्रभु नाम का गुणगान करते नजर आए। दूर-दूर से आए भक्तजन कथा श्रवण कर आध्यात्मिक शांति एवं पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं।

कार्यक्रम के अंत में भगवान श्रीकृष्ण एवं माता रुक्मणी के दिव्य विवाह उत्सव पर श्रद्धालुओं द्वारा पुष्प वर्षा की गई तथा मंगल आरती में सहभागी बनकर सभी ने पुण्य अर्जित किया।

यह पावन आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बना हुआ है, बल्कि श्रद्धालुओं के जीवन में भक्ति, प्रेम और समर्पण की भावना को भी जागृत कर रहा है।

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