अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस पर गूंजे हक़ और संघर्ष के स्वर

अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस पर गूंजे हक़ और संघर्ष के स्वर, हरिद्वार में श्रमिकों ने दी शहीदों को श्रद्धांजलि
हरिद्वार। मई दिवस आयोजन समिति के बैनर तले विभिन्न ट्रेड यूनियनों और सामाजिक संगठनों द्वारा अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस चिन्मय डिग्री कॉलेज के मैदान में श्रद्धा और जोश के साथ मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत शिकागो के अमर शहीदों तथा श्रमिक आंदोलनों में शहीद हुए मजदूरों की स्मृति में दो मिनट का मौन रखकर की गई।
इस अवसर पर इंकलाबी मजदूर केन्द्र के जय प्रकाश ने संबोधित करते हुए कहा कि वर्ष 1886 के ऐतिहासिक मई दिवस आंदोलन में मजदूरों ने अपने अधिकारों के लिए किसी से भीख नहीं मांगी, बल्कि शोषण के खिलाफ खुलकर संघर्ष किया। उन्होंने बताया कि मजदूरों ने मालिकों और सत्ता के विरुद्ध आवाज उठाते हुए 1 मई 1886 से अमेरिका में 8 घंटे कार्यदिवस लागू करने का ऐलान किया था।
“8 घंटे काम, 8 घंटे आराम और 8 घंटे मनोरंजन” के नारे के साथ यह आंदोलन धीरे-धीरे पूरी दुनिया में फैल गया। हालांकि सरकार ने इस आंदोलन को कुचलने के लिए क्रूरता का सहारा लिया और मजदूर नेताओं—एडाल्फ फिशर, अल्बर्ट पार्सन्स, जार्ज एंजिल और आगस्त स्पाइस—को फांसी दे दी।
इसके बावजूद मजदूरों का संघर्ष थमा नहीं, बल्कि और तेज हो गया। अमेरिका के साथ-साथ यूरोप के श्रमिक भी इस आंदोलन में शामिल हो गए और अंततः मजदूरों ने अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ते हुए 8 घंटे कार्यदिवस का हक हासिल कर लिया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रमिक, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे, जिन्होंने मजदूर एकता और अधिकारों की रक्षा का संकल्प लिया।

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