📰 हरिद्वार में श्रीमद् भागवत कथा का भव्य समापन, भक्तिमय माहौल में गूंजे जयकारे
बुलाकी भवन में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का आज अत्यंत भव्य एवं श्रद्धापूर्ण वातावरण में समापन हुआ। इस दिव्य आयोजन में गुजरात से आए श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और पूरे आयोजन को आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर कर दिया।
कथा के सातों दिनों तक परिसर में भक्ति, श्रद्धा और भगवान के नाम का अमृतमय रस प्रवाहित होता रहा। समापन दिवस पर विशेष पूजन, हवन एवं विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ प्राप्त किया।
इस अवसर पर भगवान श्री कृष्ण की महिमा का गुणगान करते हुए श्रद्धालुओं ने भावपूर्ण भक्ति का प्रदर्शन किया—
“जो जीवन में प्रेम, करुणा और सत्य का मार्ग दिखाएं,
वो हैं हमारे प्रभु श्री कृष्ण, जो हर हृदय में बस जाएं।”
“मुरली की मधुर तान में बसता है सारा संसार,
श्री कृष्ण की भक्ति से ही मिलता है जीवन का सच्चा आधार।”
कथा का वाचन गुजरात से पधारे 74 वर्षीय पूज्य कथा व्यास जी द्वारा किया गया। यह उनके जीवन की 74वीं श्रीमद् भागवत कथा रही, जो अपने आप में एक अद्भुत और प्रेरणादायक उपलब्धि है।
“74 वर्षों की आयु में 74 कथाओं का यह दिव्य संगम,
आपकी साधना, भक्ति और समर्पण का है अनुपम उदाहरण।”
“आपके श्रीमुख से निकली हर कथा ने जन-जन के हृदय को छुआ,
आपका जीवन स्वयं एक प्रेरणा है, जो भक्ति मार्ग को सुदृढ़ करता हुआ।”
यह आयोजन न केवल एक धार्मिक कार्यक्रम रहा, बल्कि श्रद्धालुओं के लिए आत्मिक शांति, भक्ति और आध्यात्मिक जागरण का अद्भुत अनुभव भी बना। समापन के साथ ही पूरा वातावरण ‘राधे-राधे’ और ‘जय श्री कृष्ण’ के जयकारों से गूंज उठा, जिससे हरिद्वार की पावन नगरी भक्तिमय हो गई।
हरिद्वार में श्रीमद् भागवत कथा का भव्य समापन, भक्तिमय माहौल में गूंजे जयकारे

