कपिल षष्ठी पर भगवान कपिल मुनि का पूजन, रक्तदान शिविर में उमड़ा उत्साहसंतों ने की विश्व कल्याण की प्रार्थना, सेवा और मानवता को मजबूत करने का लिया संकल्प
हरिद्वार। श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी में कपिल षष्ठी पर्व श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। पर्व के अवसर पर प्रातःकाल भगवान कपिल मुनि का विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया गया। संत-महंतों ने विश्व कल्याण एवं सभी प्राणियों के सुख-समृद्धि की कामना करते हुए ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ की प्रार्थना की।कपिल षष्ठी के अवसर पर अखाड़े की छावनी में रोटरी क्लब रानीपुर के सहयोग से रक्तदान शिविर का भी आयोजन किया गया। शिविर में लोगों ने उत्साहपूर्वक रक्तदान कर मानव सेवा का संदेश दिया।श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के सचिव एवं श्री अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज ने कहा कि भगवान कपिल मुनि भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में ज्ञान, तप और सांख्य दर्शन के महान प्रवर्तक माने जाते हैं। कपिल षष्ठी पर्व भगवान कपिल मुनि के जीवन एवं शिक्षाओं को स्मरण करने तथा समाज में सत्य, ज्ञान और मानव कल्याण के संदेश को आगे बढ़ाने का अवसर है। उनकी शिक्षाएं मनुष्य को संयम, आत्मचिंतन और आत्मज्ञान की प्रेरणा देती हैं।उन्होंने कहा कि संत समाज का दायित्व केवल धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाना ही नहीं, बल्कि समाज में सेवा, सद्भाव और मानवता की भावना को मजबूत करना भी है। उन्होंने भगवान कपिल मुनि से 26/11 जैसी आतंकी घटना की पुनरावृत्ति न होने तथा हवाई यात्रा के दौरान सैकड़ों लोगों की जान बचाने वाले भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।श्रीमहंत मनोज गिरि महाराज ने कहा कि संत परंपरा समाज को आध्यात्मिक मार्गदर्शन देने के साथ-साथ मानव सेवा के लिए भी प्रेरित करती है। भगवान कपिल मुनि की शिक्षाएं आज भी मनुष्य को ज्ञान, संयम और आत्मचिंतन का मार्ग दिखाती हैं। ऐसे पर्व समाज में आध्यात्मिक चेतना के साथ सेवा और परोपकार की भावना को भी मजबूत करते हैं।इस अवसर पर श्रीमहंत मनोज गिरि, श्रीमहंत विनोद गिरि उर्फ हनुमान बाबा, श्रीमहंत गंगा पुरी, श्रीमहंत कृष्णा गिरि, श्रीमहंत विश्वनाथ गिरि, श्रीमहंत धीरज पुरी, साध्वी गौतमी, केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे, कोठारी महंत जसविंदर सिंह, नया उदासी अखाड़े के श्रीमहंत, महामंडलेश्वर शिव प्रेमानंद, मनसा पुरी, श्रीमहंत सत्यम गिरि, सुभाष पुरी सहित अनेक संत-महंत एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।






